झारखंड उच्च न्यायालय ने जनजातीय जनसंख्या में गिरावट पर अधिकारियों से सवाल पूछे
झारखंड उच्च न्यायालय ने बांग्लादेशी घुसपैठ के दावों पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा
झारखंड उच्च न्यायालय ने आदिवासी जनसंख्या में गिरावट और कथित घुसपैठ के संबंध में छह संथाल जिलों के हलफनामों पर चिंता व्यक्त की।
जमशेदपुर – झारखंड उच्च न्यायालय ने संथाल के छह जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों द्वारा प्रस्तुत हलफनामों पर सवाल उठाए हैं।
अदालत ने बांग्लादेशी घुसपैठ और इन क्षेत्रों में जनजातीय आबादी में गिरावट के बारे में जानकारी के अभाव पर असंतोष व्यक्त किया।
मुख्य न्यायाधीश अरुण कुमार राय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केंद्र सरकार की एजेंसियों की ओर से जवाब में देरी की आलोचना की।
यह सुनवाई डेनियल डेनिश द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) का हिस्सा थी।
अदालत ने अधिकारियों के इस दावे पर सवाल उठाया कि उनके जिलों में कोई बांग्लादेशी घुसपैठ नहीं हुई है।
इसमें जनजातीय आबादी में कमी के कारणों का पता लगाने में उनकी विफलता की भी आलोचना की गई।
डीसी और एसपी को इन मुद्दों पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने संबंधित जिलों में आधार और मतदाता पहचान पत्र प्रक्रिया पर दस्तावेजीकरण का अनुरोध किया है।
अधिकारियों से अगली सुनवाई में अधिक व्यापक जानकारी प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है।
मामले की अगली सुनवाई की तारीख 5 सितंबर तय की गई है।
यह मामला झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन के बारे में बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है।
