ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती पर भव्य आयोजन, चम्पाई सोरेन ने संथाली शिक्षा पर दिया जोर
RAJNAGAR सरायकेला-खरसावां जिले के गामदेसाई (राजनगर) में संथाली भाषा की ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक चम्पाई सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने प्राथमिक स्तर से संथाली भाषा में शिक्षा शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में झारखंड में संथाली समेत सभी आदिवासी एवं स्थानीय भाषाओं में प्राथमिक शिक्षा की पहल की गई थी, जिसे बाद में बंद कर दिया गया। उनका मानना है कि ओलचिकी लिपि में शुरुआती शिक्षा देने से भाषा और साहित्य दोनों को मजबूती मिलेगी।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि अपनी माटी, भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव ही आदिवासी समाज की असली पहचान है। उन्होंने चिंता जताई कि बाहरी प्रभावों और सामाजिक चुनौतियों के बीच अपनी जड़ों को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि समाज का अस्तित्व सुरक्षित रह सके।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि लंबे संघर्ष के बाद साल 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने संथाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया था। साथ ही, वर्तमान में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा संसद की कार्यवाही का संथाली भाषा में अनुवाद भी कराया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस वर्ष केंद्र सरकार ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने पर शताब्दी समारोह मना रही है। इस अवसर पर भारत सरकार ने पंडित रघुनाथ मुर्मू के सम्मान में 100 रुपये का स्मारक सिक्का और एक विशेष डाक टिकट भी जारी किया है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने उत्साह के साथ इस आयोजन में भाग लिया।
