- कुनु बाबू’ ने 29 वर्षों तक की मुखिया के रूप में सेवा, गरीबों-आदिवासियों की रहे सशक्त आवाज
जमशेदपुर/बहरागोड़ा (पूर्वी सिंहभूम):झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले केबहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत पाथरा पंचायत के पाथरा चौक में रविवार को स्वर्गीय द्विजेन कुमार षडंगी उर्फ़ ‘कुनु बाबू’ की प्रतिमा का भव्य अनावरण समारोह आयोजित हुआ। इस भावुक कर देने वाले कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा शामिल हुए। मुख्य अतिथि के आगमन पर स्थानीय लोगों और ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया। तत्पश्चात मुंडा ने प्रतिमा का अनावरण किया और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

2 मिनट का मौन: कुनु बाबू को याद कर भावुक हुए लोगमूर्ति अनावरण के बाद, मंच पर अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और शाल देकर किया गया। इस अवसर पर अर्जुन मुंडा ने सभी उपस्थित लोगों के साथ दो मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय कुनु बाबू को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कुनु बाबू समाज के साइलेंट कर्मी थे।
गरीबों व बेजुबानों की आवाज बनकर उन्होंने न्यायालय में न्याय दिलाने का सतत प्रयास किया।मुंडा ने कहा कि आज यहां उमड़ी हजारों लोगों की भीड़ यह दर्शाती है कि कुनु बाबू ने लोगों के दिलों में कितना बड़ा स्थान बनाया था। उन्होंने याद करते हुए बताया कि उनकी कुनु बाबू से आखिरी मुलाकात जमशेदपुर में हुई थी, जहां वे स्वयं मिलने आए थे और करीब एक घंटे तक बातचीत हुई थी। उसके बाद उनका देहांत होने की खबर अत्यंत दुखद थी।29 वर्षों तक मुखिया, संथाल समाज की रहे मजबूत आवाजकार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वर्गीय द्विजेन कुमार षडंगी की सामाजिक यात्रा पर प्रकाश डाला। बताया गया कि उनकी सामाजिक यात्रा की शुरुआत ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के सानिध्य में हुई, जिनसे उन्होंने समाजसेवा के गुर सीखे। अपनी पढ़ाई पूरी कर वे अपने पैतृक गांव गन्डानाटा लौटे और मुखिया चुनाव जीतकर लगातार 29 वर्षों तक क्षेत्र की सेवा की।इस दौरान वे गरीब, वंचित और आदिवासी समाज की सशक्त आवाज के रूप में पहचाने गए। न सिर्फ बहरागोड़ा बल्कि पूरे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में वे जनता के प्रिय नेता थे। संथाल समाज उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति रहा।कुनु बाबू का जन्म 10 नवंबर 1951 को हुआ था और 19 दिसंबर 2022 को उनका निधन हो गया।

उनकी प्रतिमा ओड़िशा के ऐतिहासिक खिचिंग क्षेत्र से लाए गए विशेष पत्थर से तैयार कर बहरागोड़ा के मिस्त्रियों द्वारा बनाई गई है।पुत्र ऋषि षडंगी ने संभाली विरासतइस अवसर पर कुनु बाबू के पुत्र ऋषि षडंगी के योगदान का भी उल्लेख किया गया। ऋषि ने 25 वर्षों तक मीडिया उद्योग में (डिज़्नी-हॉटस्टार के शीर्ष पद तक) महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, लेकिन पिता की अधूरी सामाजिक सेवा को आगे बढ़ाने का निर्णय लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वे वर्तमान में भाजपा से जुड़कर क्षेत्र की जनता के बीच सक्रिय हैं।इन गणमान्य व्यक्तियों की रही उपस्थितिकार्यक्रम में जिला अध्यक्ष चंडी चरण साहू, सांसद के पुत्र कुणाल महतो, स्वर्गीय कुनु बाबू की पत्नी सुस्मिता सारंगी, पुत्री रुचि सारंगी, गौरब पुष्टि, प्रबोध रंजन दास, अजय साह, सुनीता देबदूत सोरेन, दिनेश साहू, फूलमनी मुर्मू, राधि मुर्मू, परमेश्वर हेंब्रम, चंद्र मोहन मंडी, आशुतोष मिश्रा, मनोज गिरी, आनंद अग्रवाल, चितरंजन महापात्र, रामनाथ सिंह, धनेश्वर मुर्मू सहित हजारों लोग मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान भावनात्मक माहौल बना रहा और लोगों ने अपने प्रिय नेता को नम आंखों से याद किया।

