ओडिशा में भारी बारिश से भूस्खलन, जगह-जगह उखड़े पेड़, जनजीवन प्रभावित
मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा, गजपति, गंजम, कंधमाल, कालाहांडी और नवरंगपुर जिलों में असर
Cyclone Storm Montha : ओडिशा के तटीय और दक्षिणी जिलों में भीषण चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ की वजह से मंगलवार को भारी बारिश होने से भूस्खलन हुआ, घरों को नुकसान पहुंचा और कई जगह पेड़ भी उखड़ गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
मौसम विभाग ने बताया कि मोंथा के तट से टकराने की शुरुआत पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में शाम लगभग सात बजे से हुई, जो तीन से चार घंटे तक जारी रहेगी। दक्षिणी ओडिशा के आठ जिलों मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा, गजपति, गंजम, कंधमाल, कालाहांडी और नवरंगपुर से नुकसान की प्रारंभिक खबरें प्राप्त हुई है। हालांकि, क्षेत्र के कुल 15 जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। गजपति के अनाका ग्राम पंचायत से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पास की पहाड़ियों से बड़े-बड़े पत्थर गिरे, जिससे 5 गांवों की सड़कें अवरुद्ध हो गईं।
स्थानीय पंचायत पदाधिकारी बालकृष्ण मलिक ने मीडिया को बताया कि इस जगह को पहले भूस्खलन-प्रवण क्षेत्र के रूप में पहचाना गया था। इसलिए सड़कों से पत्थरों को जल्द से जल्द हटाने के लिए व्यवस्था की गई है। गजपति के काशीनगर ब्लॉक की परतोदा पंचायत में लिंगा-बारभा मार्ग पर भी भूस्खलन की सूचना मिली है। रायगढ़ जिले के गुनुपुर, गुदारी और रामनागुड़ा इलाकों में भी पेड़ उखड़ गए। चक्रवात के राज्य से गुजरने के बाद विभिन्न जिलों से हुए नुकसान की रिपोर्ट संकलित की जाएगी।
गजपति जिले से मिली जानकारी के मुताबिक, पोतारा पंचायत में चक्रवात आश्रय स्थल के प्रबंधन में लगे एक आपूर्ति सहायक की सोमवार रात अचानक बीमार पड़ने से मौत हो गई। पंचायत समिति सदस्य लोकनाथ दलाई ने बताया कि मृतक की पहचान सुरेंद्र गमांग के रूप में हुई है, जो सोमवार को लोगों को चक्रवात आश्रय स्थल पर ला रहा था। पुलिस ने अब तक गमांग की मौत के कारण की पुष्टि नहीं की है। गजपति जिले के मोहना से मिली जानकारी के अनुसार, लगातार बारिश के कारण एक कच्चा मकान ढह गया, जिससे एक व्यक्ति घायल हो गया।
तेज हवा के कारण इलाके के एक मकान की टिन की छत उड़ गई। भुवनेश्वर मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक डॉ. मनोरमा मोहंती ने बताया कि शाम लगभग 7 बजे भीषण चक्रवाती तूफान मोंथा के टकराने की शुरुआत हुई और यह प्रक्रिया तीन से चार घंटे तक जारी रहेगी। तूफान के आगमन के दौरान हवा की गति 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जो 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस आपदा के संभावित प्रभाव के लिए राज्य की तैयारियों की समीक्षा की। चक्रवाती तूफान ने राज्य के तटीय और दक्षिणी क्षेत्रों के 15 जिलों में पहले ही सामान्य जनजीवन प्रभावित कर दिया है। प्रभावित लोगों को आश्रय देने के लिए 2,000 से ज्यादा चक्रवात आश्रय स्थल स्थापित किए गए हैं। सरकार ने किसी भी तरह के जानमाल नहीं होने देने का लक्ष्य रखा है।
