अलकायदा मुकदमा: पुलिस की प्रमुख गवाही से अभियोजन पक्ष को मजबूती मिली
बिष्टुपुर के पूर्व पुलिस प्रमुख और अधिकारी ने कथित अलकायदा ऑपरेटिव की 2016 में हुई गिरफ्तारी का ब्यौरा दिया
बिष्टुपुर के पूर्व पुलिस अधिकारियों ने चल रहे अलकायदा मुकदमे में महत्वपूर्ण साक्ष्य देते हुए आरोपी आतंकवादियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन किया है।
जमशेदपुर – बिष्टुपुर के पूर्व थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह और पुलिसकर्मी दिलीप कुमार यादव ने अलकायदा मुकदमे में एडीजे-1 विमलेश कुमार सहाय के समक्ष अहम गवाही दी।
पाकुड़ सदर में डीएसपी सिंह ने 22 जनवरी 2016 की घटना का जिक्र किया, जब उन्हें अहमद मसूद अकरम शेख के कथित अलकायदा से संबंधों के बारे में सूचना मिली थी।
पूर्व पुलिस प्रमुख ने कहा कि मसूद ने शुरू में इसमें शामिल होने से इनकार किया था, लेकिन बाद में 25 जनवरी 2016 को उसने अलकायदा के साथ अपने संबंध स्वीकार कर लिए।
मसूद ने कथित तौर पर अब्दुल रहमान उर्फ कटकी से अपने संबंध और सऊदी अरब में जिहादी प्रशिक्षण का खुलासा किया।
जांच के दौरान मसूद के आवास से 9 एमएम की लोडेड पिस्तौल जब्त की गई।
सिंह की गवाही में मौलाना कलीमुद्दीन के मैंगो स्थित घर को संगठन के लिए भर्ती केंद्र के रूप में उजागर किया गया।
दिलीप कुमार यादव, जो वर्तमान में हटिया रेलवे स्टेशन पर सहायक उपनिरीक्षक हैं, ने इस हत्याकांड में अपनी भूमिका के बारे में गवाही दी। बिष्टुपुर पुलिस स्टेशन पर छापा.
आरोपी अहमद मसूद अकरम उर्फ मसूद और अब्दुल रहमान उर्फ कटकी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश हुए, जबकि राजू उर्फ नसीम अख्तर व्यक्तिगत रूप से मौजूद था।
सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि इस मामले का निपटारा छह महीने के भीतर किया जाए।
अब तक सात गवाहों की गवाही हो चुकी है तथा अगली सुनवाई 7 अगस्त को निर्धारित की गई है।
