जमशेदपुर : युवा शतरंज खिलाड़ी अधिराज मित्रा ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। श्रीलंका में आयोजित कॉमनवेल्थ यूथ शतरंज चैंपियनशिप 2026 में अधिराज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन प्रतिष्ठित पदक अपने नाम किए। उन्होंने ब्लिट्ज शतरंज में स्वर्ण पदक, रैपिड शतरंज में रजत पदक तथा क्लासिकल शतरंज में कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
लोयोला स्कूल, जमशेदपुर के छात्र अधिराज मित्रा ने इस उपलब्धि के साथ भारतीय शतरंज इतिहास में अपनी खास पहचान बनाई है। झारखंड के उभरते युवा खिलाड़ियों में उनकी गिनती अब प्रमुख प्रतिभाओं में होने लगी है। उनकी इस सफलता से पूर्वी सिंहभूम समेत पूरे राज्य में खुशी और गर्व का माहौल है।
अधिराज की यह उपलब्धि उनके वर्ष 2025 के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद आई है, जब उन्होंने मलेशिया में आयोजित कॉमनवेल्थ यूथ शतरंज चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। इस वर्ष तीन और पदक जीतने के साथ ही वह झारखंड के पहले ऐसे शतरंज खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने कॉमनवेल्थ स्तर की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतने का गौरव हासिल किया है।
राज्यभर के खेल प्रेमियों और शतरंज विशेषज्ञों ने अधिराज की निरंतरता, अनुशासन और रणनीतिक कौशल की जमकर सराहना की है। प्रशिक्षकों और खेल अधिकारियों का कहना है कि अधिराज की उपलब्धियां छोटे शहरों और कस्बों के हजारों युवा खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए प्रेरित करेंगी।
एक साधारण शतरंज प्रेमी से अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता बनने तक का अधिराज का सफर कठिन मेहनत, समर्पण और मानसिक दृढ़ता का प्रतीक है। उनकी सफलता ने न केवल झारखंड का मान बढ़ाया है, बल्कि पूर्वी भारत से उभर रही खेल प्रतिभाओं को भी नई पहचान दिलाई है।
