August 28, 2026
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दिल्ली में आग हादसे में सीसीआई के पहले अध्यक्ष धनेन्द्र कुमार का निधन

दिल्ली में आग हादसे में सीसीआई के पहले अध्यक्ष धनेन्द्र कुमार का निधन

हौज खास स्थित आवास में एसी विस्फोट के बाद लगी आग

मुख्य बिंदु:

  • एसी विस्फोट के बाद लगी आग में धनेन्द्र कुमार का निधन
  • घटना में उनका बेटा घायल, अस्पताल में उपचार जारी
  • प्रतिस्पर्धा आयोग के पहले अध्यक्ष रह चुके थे धनेन्द्र कुमार

नई दिल्ली – हौज खास स्थित आवास में आग लगने की घटना में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के पहले अध्यक्ष धनेन्द्र कुमार का निधन हो गया।

गुरुवार रात उनके घर में आग लगी। प्रारंभिक जांच में एसी विस्फोट की आशंका जताई गई है।

इसके अलावा, घटना रात करीब 11:18 बजे हुई। उस समय घर में पांच लोग मौजूद थे।

वहीं, सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग पहुंचे। तत्काल बचाव अभियान शुरू किया गया।

इसके बाद, धनेन्द्र कुमार और उनके बेटे को बाहर निकाला गया। दोनों को अस्पताल ले जाया गया।

हालांकि, उपचार के दौरान धनेन्द्र कुमार का निधन हो गया। बताया गया कि उन्होंने धुएं के कारण दम तोड़ा।

उधर, उनका बेटा घायल हुआ है। उसकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है।

इसी बीच, पुलिस और फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू की। आग के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि अब तक किसी साजिश के संकेत नहीं मिले हैं। जांच एजेंसियां तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

वहीं, धनेन्द्र कुमार 1968 बैच के आईएएस अधिकारी थे। उन्होंने केंद्र और हरियाणा सरकार में कई महत्वपूर्ण पद संभाले।

इसके अलावा, उन्होंने रक्षा, सड़क परिवहन और संस्कृति मंत्रालयों में कार्य किया। ग्रामीण विद्युतीकरण निगम का भी नेतृत्व किया।

उधर, वर्ष 2005 से 2009 तक वह विश्व बैंक में भारत के कार्यकारी निदेशक रहे। उन्होंने दक्षिण एशिया से जुड़े कई विकास कार्यक्रमों में भूमिका निभाई।

इसके बाद, फरवरी 2009 में उन्हें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का पहला अध्यक्ष बनाया गया। वह जून 2011 तक इस पद पर रहे।

वहीं, उनके नेतृत्व में आयोग ने प्रतिस्पर्धा कानून के ढांचे को मजबूत किया। निष्पक्ष बाजार व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नीति के मसौदे पर भी काम किया। कई सरकारी समितियों का नेतृत्व भी किया।

दूसरी ओर, हरियाणा में उन्होंने औद्योगिक विकास और प्रशासनिक सुधारों में योगदान दिया। उनकी सेवाओं के लिए कई सम्मान भी मिले।

सेवानिवृत्ति के बाद भी वह सार्वजनिक नीति से जुड़े रहे। विभिन्न संस्थानों में सलाहकार और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते रहे।

(आईएएनएस से प्राप्त सूचनाओं पर आधारित)

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