आनंद मार्ग जागृति में तीन घंटे चला अखंड कीर्तन, ग्रामीणों को फलदार पौधे बांटे गए
मुख्य बिंदु:
- गदरा में तीन घंटे का अखंड कीर्तन आयोजित किया गया
- पचास महिलाओं को साड़ी और ग्रामीणों को पौधे दिए गए
- नारायण सेवा के साथ होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर लगा
जमशेदपुर – गदरा आनंद मार्ग जागृति में सेवा और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कार्यक्रम में तीन घंटे का एक प्रहर अखंड कीर्तन हुआ। वहीं, बाबा नाम केवलम का सामूहिक जाप किया गया।
इसके अलावा, डॉ. लाल बिहारी आनंद ने होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा दी। उन्होंने जरूरतमंदों को दवाएं भी उपलब्ध कराईं।
वहीं, 50 महिलाओं के बीच साड़ियों का वितरण किया गया। ग्रामीणों के बीच घूमकर फलदार पौधे भी बांटे गए।
इसके बाद नारायण सेवा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक सेवा को आध्यात्मिक साधना से जोड़ा गया।
कीर्तन समाप्ति के बाद सुनील आनंद ने आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। उन्होंने कीर्तन को ईश्वर प्राप्ति का सहज माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि कीर्तन भक्ति और ध्यान का प्रभावी माध्यम है। इसके जरिए व्यक्ति ईश्वर से गहरा संवाद स्थापित करता है।
इसके अलावा, कीर्तन मन को स्थिर करने में सहायक होता है। इससे आनंद और एकाग्रता की अनुभूति होती है।
वहीं, उन्होंने मन के संयम पर भी जोर दिया। कीर्तन से इंद्रिय विषयों के प्रति वैराग्य बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि कीर्तन अशांति और तनाव से राहत देता है। इससे आंतरिक शक्ति को पहचानने में सहायता मिलती है।
इसके बाद उन्होंने कीर्तन को साधना का माध्यम बताया। इससे मानसिक और आत्मिक स्वतंत्रता का अनुभव होता है।
वहीं, प्रेम, सहानुभूति और एकाग्रता विकसित होने की बात कही गई। इससे जीवन में सुख और आनंद की अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि कीर्तन परम शांति की ओर ले जाता है। इसके माध्यम से आंतरिक जगत को शुद्ध किया जा सकता है।
अंत में उन्होंने सेवा भावना को कीर्तन से जोड़ा। उनके अनुसार, इससे सभी के प्रति प्रेम और सेवा बढ़ती है।



