नई दिल्ली : टाटा पावर कंपनी लिमिटेड की सहायक कंपनी टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (TPREL) ने तमिलनाडु के कयथार में 100 मेगावाट क्षमता वाले ग्रुप कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है।
वेल्लालनकोट्टई और नालंधुला गांवों में विकसित इस परियोजना के शुरू होने के साथ कंपनी का यूटिलिटी रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो बढ़कर 12.3 गीगावाट हो गया है। वहीं, कंपनी की कुल ऑपरेशनल क्षमता 7 गीगावाट के पार पहुंच गई है।
यह परियोजना टाटा समूह की कंपनियों की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उनके डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। परियोजना से उत्पादित बिजली टाटा समूह की तीन कंपनियों को उपलब्ध कराई जाएगी।
टाटा समूह की तीन कंपनियों को मिलेगी बिजली
100 मेगावाट के इस सोलर प्रोजेक्ट से टीपी सोलर लिमिटेड को 40.625 मेगावाट, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड को 53.125 मेगावाट और टाटा रियल्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को 6.25 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जाएगी।
टीपी सोलर टाटा पावर की सोलर मैन्युफैक्चरिंग इकाई है, जो हाई-एफिशिएंसी सोलर सेल और मॉड्यूल तैयार करती है। वहीं, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सेमीकंडक्टर, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में काम करती है। टाटा रियल्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से जुड़ी कंपनी है।
हर साल 240.63 मिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पादन
कयथार सोलर प्रोजेक्ट को हर साल करीब 240.63 मिलियन यूनिट ग्रीन एनर्जी पैदा करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे सालाना लगभग 1.5 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है।
इस परियोजना से न केवल टाटा समूह की कंपनियों की अक्षय ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि उनके सतत और कम-कार्बन वाले संचालन को भी बढ़ावा मिलेगा।
पहली बार इस्तेमाल हुई फ्लेक्सिबल टेरेन कम्पैटिबल ट्रैकर तकनीक
परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में से एक फ्लेक्सिबल टेरेन कम्पैटिबल (FTC) सिंगल-एक्सिस ट्रैकर तकनीक है। कंपनी के अनुसार, टाटा के किसी प्रोजेक्ट में इस तकनीक का पहली बार इस्तेमाल किया गया है।
इस सोलर प्लांट में 2,61,660 मोनो PERC बाइफेशियल सोलर मॉड्यूल्स लगाए गए हैं। ट्रैकर तकनीक और बाइफेशियल मॉड्यूल्स के इस्तेमाल से अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में सौर ऊर्जा उत्पादन को बेहतर बनाने और प्लांट की ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
परियोजना से पैदा होने वाली बिजली को कयथार 400 केवी ग्रिड सबस्टेशन के जरिए ट्रांसमिट किया जाएगा। इससे लाभार्थी कंपनियों को अक्षय ऊर्जा की भरोसेमंद और कुशल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
टाटा पावर रिन्यूएबल्स की क्षमता में लगातार विस्तार
टीपीआरईएल की मौजूदा 7 गीगावाट ऑपरेशनल क्षमता में 5.7 गीगावाट से अधिक सोलर और 1.3 गीगावाट विंड एनर्जी क्षमता शामिल है।
कंपनी के पास इसके अलावा 5.3 गीगावाट की अतिरिक्त रिन्यूएबल एनर्जी पाइपलाइन भी है। इसमें 2.2 गीगावाट सोलर और 3.1 गीगावाट विंड प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन परियोजनाओं को अगले 6 से 24 महीनों के दौरान चरणबद्ध तरीके से चालू करने की योजना है।
टीपीआरईएल बड़े पैमाने की यूटिलिटी-स्केल सोलर परियोजनाओं के साथ-साथ फ्लोटिंग सोलर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी काम कर रही है।
कयथार परियोजना के शुरू होने से कंपनी की भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में मौजूदगी और मजबूत हुई है। साथ ही, यह देश के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य में योगदान देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।