August 21, 2026
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जमशेदपुर

साकची गुरुद्वारा कमेटी के निबंधन पर CGPC को झटका, संयुक्त जांच रिपोर्ट में स्वतंत्र संस्था के रूप में मान्यता

साकची गुरुद्वारा कमेटी के निबंधन पर CGPC को झटका, संयुक्त जांच रिपोर्ट में स्वतंत्र संस्था के रूप में मान्यता

जमशेदपुर: साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के निबंधन को रद्द कराने की कोशिश में सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (सीजीपीसी) को बड़ा झटका लगा है। निबंधन कार्यालयों के निरीक्षक, कोल्हान प्रमंडल और सहायक निबंधन महानिरीक्षक की संयुक्त जांच रिपोर्ट में साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को स्वतंत्र एवं पृथक रूप से निबंधित धार्मिक संस्था माना गया है। रिपोर्ट में इसके संविधान और उपनियमों को भी विधिक रूप से प्रभावी बताया गया है।

साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का निबंधन संख्या 33/2015-16 है। इसके निबंधन को लेकर सीजीपीसी की ओर से शिकायत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2015-16 में साकची गुरुद्वारा प्रबंधन ने सीजीपीसी को विश्वास में लिए बिना निबंधन कराया और अपने उपनियमों में संशोधन किया।

संयुक्त जांच के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट में इन आरोपों की विस्तृत जांच, दोनों पक्षों की सुनवाई और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद निष्कर्ष दिया गया कि साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का स्वतंत्र निबंधन और उसका संविधान विधिक रूप से मान्य है।

किसी अन्य संस्था के नियमों या निर्णय के आधार पर साकची गुरुद्वारा की वैधानिक स्थिति को चुनौती नहीं दी जा सकती।

संयुक्त जांच रिपोर्ट से साकची गुरुद्वारा का पक्ष मजबूत

बुधवार को साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार निशान सिंह और जमशेदपुर न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के अधिवक्ता केएम सिंह ने संवाददाता सम्मेलन कर संयुक्त जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया।

केएम सिंह ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद जांच समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एक स्वतंत्र रूप से निबंधित संस्था है और उसका संविधान विधिक रूप से प्रभावी है।

उन्होंने कहा कि किसी दूसरी संस्था के नियमों के आधार पर साकची गुरुद्वारा कमेटी के स्वतंत्र अस्तित्व और वैधानिक अधिकारों को समाप्त नहीं किया जा सकता। यदि किसी पक्ष को अधिकारों को लेकर आपत्ति है, तो उसके निस्तारण के लिए न्यायालय उचित मंच है।

सीजीपीसी के दावे पर भी रिपोर्ट में स्थिति स्पष्ट

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि किसी संस्था के संशोधित उपनियम निबंधन विभाग के पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपलोड नहीं किए गए हैं, तो उन्हें संबंधित संस्था के विधिवत बाई-लॉ का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इस निष्कर्ष से शिकायत के एक प्रमुख आधार पर सवाल खड़ा हो गया है।

रिपोर्ट के अनुसार साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का स्वतंत्र संविधान प्रभावी है और उसकी वैधता किसी अन्य संस्था के दावे या निर्णय से समाप्त नहीं हो सकती।

वहीं, यदि सीजीपीसी अपने पुराने जनरल बोर्ड से पारित नियमों या संशोधनों को प्रभावी कराना चाहती है, तो उसे निबंधन विभाग के समक्ष निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए अपने बाई-लॉ में संशोधन कराना होगा। केवल दावा करने से ऐसे नियम स्वत: प्रभावी नहीं माने जा सकते।

संपत्ति और नियंत्रण के विवाद पर सिविल कोर्ट का अधिकार

संयुक्त जांच प्रतिवेदन में परिसंपत्तियों और संस्था के नियंत्रण से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इस तरह के अधिकार संबंधी विवादों का फैसला निबंधन विभाग के स्तर पर नहीं, बल्कि सक्षम व्यवहार न्यायालय यानी सिविल कोर्ट में होना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक उप निबंधन महानिरीक्षक के निर्देश पर दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना गया। 25 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में दोनों पक्ष उपस्थित हुए और लिखित एवं मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किए।

शिकायतकर्ता की ओर से वर्ष 2003 के जनरल बोर्ड से पारित बताए गए नियम एवं उपनियम भी जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत किए गए। समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों और पक्षों के बयानों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद अपना निष्कर्ष दिया।

निशान सिंह ने बताया पूरे सिख समाज की जीत

साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार निशान सिंह ने संयुक्त जांच रिपोर्ट को संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे केवल साकची गुरुद्वारा कमेटी की नहीं, बल्कि पूरे सिख समाज की जीत बताया।

संयुक्त जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के बाद साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अपने स्वतंत्र निबंधन, संविधान और वैधानिक अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का दावा किया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोई अन्य स्वतंत्र संस्था, चाहे वह सीजीपीसी ही क्यों न हो, अपने नियमों या संशोधनों के आधार पर साकची गुरुद्वारा कमेटी के निबंधन अथवा उसकी वैधानिक स्थिति को प्रभावित नहीं कर सकती।

दूसरी आेर सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (सीजीपीसी) की ओर से इस मामले में कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

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