विधायक के हस्तक्षेप पर मेयर का पलटवार, बोलीं—निगम में दखल बर्दाश्त नहीं
मुख्य बिंदु:
– मेयर ने विधायक के हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति जताई
– सुधा गुप्ता ने कार्यपालिका और विधायिका की सीमा बताई
– राजनीतिक दबाव से विकास प्रभावित नहीं होने देने की चेतावनी
जमशेदपुर – मानगो निगम में अधिकारों को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है।
मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता ने विधायक सरयू राय को घेरा है।
मामला निगम अधिकारियों के साथ विधायक की बैठक से जुड़ा है।
विधायक ने अधिकारियों को उनके अधिकारों की जानकारी दी थी।
इसके बाद मेयर ने इस कदम पर कड़ा एतराज जताया।
उन्होंने इसे निगम की व्यवस्था में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया।
हालांकि, मेयर ने जनसमस्याओं की समीक्षा से इनकार नहीं किया।
उनका कहना है कि संस्थागत सीमाओं का सम्मान जरूरी है।
वहीं, उन्होंने अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव को लेकर भी चेताया।
मेयर ने कहा कि निगम किसी राजनीतिक गुट की जागीर नहीं है।
यह संस्था 36 वार्डों की जनता के लिए काम करती है।
विधायक के अधिकारों पर मेयर ने उठाए सवाल
सुधा गुप्ता ने जनप्रतिनिधियों की संवैधानिक भूमिकाओं का हवाला दिया।
उनके अनुसार विधायक की मुख्य भूमिका विधायी कार्यों से जुड़ी है।
विधायक विधानसभा में कानून और बजट पर चर्चा करते हैं।
इसके अलावा, सरकार की जवाबदेही भी विधायक तय करते हैं।
मेयर के अनुसार प्रशासन चलाना विधायक की भूमिका नहीं है।
उन्होंने कहा कि कार्यकारी अधिकार अलग संस्थागत व्यवस्था में आते हैं।
वहीं, उन्होंने विधायक निधि को भी अलग विषय बताया।
उनके अनुसार निधि की अनुशंसा कार्यकारी नियंत्रण के समान नहीं है।
मेयर ने इसी आधार पर निगम हस्तक्षेप पर सवाल उठाया।
मेयर ने निगम की भूमिका भी साफ कर दी
सुधा गुप्ता ने नगर निगम की भूमिका भी स्पष्ट की।
उनके अनुसार मेयर निगम के राजनीतिक प्रमुख होते हैं।
वहीं, निगम सदन नीतिगत फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सदन की बैठकों और बजट से जुड़े कार्य भी होते हैं।
इसके अलावा, योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रशासनिक अमले की है।
मेयर ने नगर आयुक्त की प्रशासनिक भूमिका का उल्लेख किया।
उनके अनुसार बजट और योजनाओं का क्रियान्वयन प्रशासन करता है।
इसी व्यवस्था में अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती है।
15 महीने के सवाल पर मेयर का सीधा वार
मेयर ने विधायक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने करीब 15 महीने की अवधि का उल्लेख किया।
उनके अनुसार इस दौरान निगम पर लगातार सवाल उठते रहे।
इसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी होने लगी तो तस्वीर बदली।
मेयर ने पूछा कि अचानक परिस्थितियां कैसे बदल गईं।
उनका कहना है कि जनता को इसका जवाब चाहिए।
हालांकि, उन्होंने अनियमितता के आरोपों की जांच का रास्ता खुला रखा।
उन्होंने दस्तावेज सामने रखने की बात कही।
सुधा गुप्ता ने विधिसम्मत जांच कराने की मांग की।
उनके अनुसार आरोपों की जगह प्रमाण सामने आने चाहिए।
टेंडर और पुराने कामों पर भी सख्त रुख
मेयर ने पुराने कार्यों और ठेकेदारों का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिशों पर चेतावनी दी।
उनके अनुसार नियमों के खिलाफ कोई दबाव स्वीकार नहीं होगा।
वहीं, फाइलों को दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
भुगतान भी नियमों के अनुसार ही होने की बात कही।
मेयर ने कर्मचारियों को राजनीतिक दबाव से बचने को कहा।
उन्होंने ईमानदारी से काम करने वालों का समर्थन किया।
इसके अलावा, उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर दिया।
महिला होने को कमजोरी समझने वालों को सीधी चेतावनी
सुधा गुप्ता ने अपने तेवर भी स्पष्ट कर दिए।
उन्होंने कहा कि महिला होना उनकी कमजोरी नहीं है।
उनके अनुसार धमकी से उन्हें पीछे नहीं हटाया जा सकता।
वहीं, राजनीतिक ताकत का दबाव भी स्वीकार नहीं होगा।
उन्होंने जनता के पैसे से समझौता नहीं करने की बात कही।
इसके अलावा, विकास कार्यों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
मानगो को सड़क, पानी और सफाई चाहिए
मेयर ने विवाद को जनता की सुविधाओं से जोड़ा।
उन्होंने मानगो के विकास को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया।
मानगो के लोगों को सड़क और पानी की जरूरत है।
इसके अलावा, सफाई और सीवरेज भी बड़े मुद्दे हैं।
मेयर के अनुसार राजनीति से ज्यादा जरूरी परिणाम हैं।
वहीं, जनसमस्याओं की समीक्षा करने पर उन्हें आपत्ति नहीं है।
लेकिन संस्थागत व्यवस्था कमजोर करना स्वीकार नहीं होगा।
उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों में टकराव से भी चेताया।
निगम में वर्चस्व की लड़ाई अब खुलकर सामने
सरयू राय और सुधा गुप्ता के बीच यह टकराव अहम है।
एक तरफ विधायक ने निगम अधिकारियों से बैठक की।
दूसरी तरफ मेयर ने अधिकारों की सीमा पर सवाल उठाया।
इससे निगम की आंतरिक राजनीति खुलकर सामने आ गई है।
हालांकि, दोनों पक्षों के दावों का अंतिम निर्णय बाकी है।
फिलहाल मेयर ने अपने रुख में नरमी नहीं दिखाई।
उन्होंने साफ किया कि निगम कामकाज नियमों से चलेगा।
वहीं, राजनीतिक दबाव के खिलाफ उनका तेवर कायम है।
मानगो में अब असली सवाल अधिकारों की सीमा का है।
इसके साथ विकास कार्यों की पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण बनी है।
आने वाले दिनों में यह विवाद और गरमा सकता है।
