बोले- जेएसएससी सीजीएल परीक्षा मामले में भी सीआईडी जांच से नहीं आया कोई ठोस नतीजा सामने
रांची: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी की 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रविवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि राज्य की भर्ती प्रक्रिया भ्रष्टाचार की गिरफ्त में है और अभ्यर्थियों से परीक्षा के अलग-अलग चरणों में भारी रकम वसूली जाती है।
मरांडी ने आरोप लगाया कि प्रारंभिक (पीटी) परीक्षा पास कराने के लिए अभ्यर्थियों से 5 लाख रुपये, मुख्य परीक्षा (मेंस) के लिए 25 लाख रुपये और साक्षात्कार (इंटरव्यू) के लिए 10 लाख रुपये तक की मांग की जाती है। उनके मुताबिक, कुल 40 लाख रुपये देने के बाद ही किसी उम्मीदवार को अधिकारी बनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि जेपीएससी परीक्षा में सामने आई अनियमितताएं महज प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक सुनियोजित भर्ती घोटाले का हिस्सा हैं। मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सीआईडी जांच के जरिए वास्तविक दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
‘युवाओं के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उनका आरोप था कि सरकार जानबूझकर ऐसे अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां सौंपती है, जिनकी कार्यशैली पहले भी सवालों के घेरे में रही है। इससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
सरकारी नौकरियों में अवैध वसूली का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का नेटवर्क सक्रिय है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा से लेकर मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू तक अभ्यर्थियों से अलग-अलग स्तर पर धन की मांग की जाती है।
उन्होंने जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि केवल पद छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और आवश्यक होने पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।
JSSC-CGL मामले का भी दिया उदाहरण
मरांडी ने कहा कि इससे पहले जेएसएससी सीजीएल परीक्षा मामले में भी सीआईडी जांच से कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया था। उन्होंने दावा किया कि जनवरी में कर्नाटक के एक छात्र ने तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष को पत्र लिखकर ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ी और परीक्षा से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा पैसे वसूले जाने की शिकायत की थी, लेकिन उस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जांच प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं नहीं लगाई गई हैं। उनका आरोप था कि प्राथमिकी सामान्य धाराओं में दर्ज की गई है, जिससे आरोपियों को कानूनी लाभ मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
मरांडी ने सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि जांच किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त होनी चाहिए ताकि युवाओं को न्याय मिल सके।
