जमशेदपुर/मुंबई: टाटा स्टील फाउंडेशन की ट्राइबल क्यूज़ीन (Tribal Cuisine) पहल के तहत इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) और इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IHM), औरंगाबाद के सहयोग से आयोजित 10 दिवसीय बुनियादी क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हो गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय घरेलू रसोइयों के पारंपरिक पाक कौशल को आधुनिक आतिथ्य उद्योग के मानकों से जोड़ते हुए उन्हें आजीविका के नए अवसरों के लिए तैयार करना था।
13 से 23 जुलाई 2026 तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में देश के आठ राज्यों की 12 जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला ने जनजातीय खाद्य संस्कृति के संरक्षण, पारंपरिक व्यंजनों के आदान-प्रदान और आधुनिक पाक तकनीकों के समावेश के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को खाद्य स्वच्छता एवं सुरक्षा, रसोई संचालन, व्यंजनों का मानकीकरण, मेन्यू प्लानिंग, भोजन की आकर्षक प्रस्तुति, ग्राहक सेवा और पेशेवर कुकिंग प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में कक्षा आधारित सत्रों के साथ लाइव डेमोंस्ट्रेशन और सहभागितापूर्ण गतिविधियों को भी शामिल किया गया, जिससे प्रतिभागियों को आधुनिक हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिला।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने आतिथ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों, पाक कला प्रशिक्षकों और विभिन्न राज्यों से आए अन्य जनजातीय घरेलू रसोइयों के साथ संवाद कर अनुभव साझा किए।
इससे उन्हें अपनी पारंपरिक खाद्य विरासत को नए स्वरूप में प्रस्तुत करने और उसकी मौलिकता बनाए रखते हुए व्यावसायिक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला।
इस प्रशिक्षण से प्रतिभागियों को अपने व्यंजनों की गुणवत्ता, एकरूपता और प्रस्तुति में सुधार करने में मदद मिलेगी। साथ ही वे भविष्य में घरेलू फूड बिजनेस, कैटरिंग सेवाओं, फूड फेस्टिवल, पॉप-अप डाइनिंग और अन्य बाजार आधारित अवसरों के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे।
इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (ह्यूमन रिसोर्स) गौरव पोखरियाल ने कहा कि क्षमता निर्माण आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक पाक कौशल को पेशेवर हॉस्पिटैलिटी प्रशिक्षण से जोड़ने वाली यह पहल प्रतिभागियों के कौशल को सशक्त बनाते हुए उनके लिए स्थायी आजीविका के नए रास्ते खोलती है।
टाटा स्टील फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सौरव रॉय ने कहा कि भारत के जनजातीय समुदायों की पाक परंपराएं पीढ़ियों से संजोए गए ज्ञान और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं।
ट्राइबल क्यूज़ीन पहल का उद्देश्य इन पारंपरिक व्यंजनों को व्यापक पहचान दिलाना, जनजातीय रसोइयों की आजीविका मजबूत करना और उनकी विशिष्ट खाद्य विरासत को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला जनजातीय पाक कला के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहां पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक आतिथ्य और उद्यमिता के साथ सम्मानपूर्वक जोड़ा जा रहा है।
टाटा स्टील फाउंडेशन का मानना है कि यह पहल केवल जनजातीय खाद्य परंपराओं के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को आर्थिक सशक्तिकरण और सतत आजीविका से जोड़ने का भी प्रभावी प्रयास है।
आधुनिक हॉस्पिटैलिटी प्रथाओं के साथ पारंपरिक पाक ज्ञान का समन्वय जनजातीय व्यंजनों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।