कटिहार: बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कहीं घरों में पानी घुस गया है तो कहीं सड़कें और गांवों को जोड़ने वाले रास्ते जलमग्न हैं। इन मुश्किल हालात के बीच कटिहार से सामने आई एक तस्वीर जिंदगी और खुशियों के हौसले की कहानी बयां कर रही है।
बाढ़ के पानी के बीच जब सड़क से बारात ले जाना संभव नहीं हुआ तो दूल्हा नाव पर सवार होकर दुल्हन के घर पहुंचा। शहनाई की गूंज और बाढ़ के पानी के बीच निकली इस अनोखी बारात ने हर किसी का ध्यान खींच लिया।
कटिहार के चार प्रखंड इस समय बाढ़ की चपेट में हैं। कई इलाकों में आवागमन प्रभावित है और लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए भी पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। इसी चुनौती के बीच मनिहारी प्रखंड के कालीगंज निवासी मोहम्मद शफीक ने अपनी शादी की खुशियों को बाढ़ के कारण रुकने नहीं दिया।
सड़क डूबी तो नाव बनी बारात का सहारा
मोहम्मद शफीक की शादी बरारी प्रखंड के सुखासन पंचायत के ठोठीबाग निवासी फरहद के साथ तय हुई थी। शादी का दिन आया तो दोनों परिवारों के सामने बाढ़ के कारण आवागमन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। दुल्हन के घर तक जाने वाले रास्ते पानी में डूबे हुए थे और सड़क मार्ग से बारात ले जाना बेहद मुश्किल था।
ऐसे में परिवार ने रास्ता बदलने के बजाय साधन बदलने का फैसला किया। शफीक परिजनों और बारातियों के साथ नाव पर सवार हुए और बाढ़ के पानी को पार करते हुए दुल्हन के घर के लिए रवाना हो गए।
नाव पर सजे-धजे दूल्हे और बारातियों को देखकर रास्ते में मौजूद लोग भी कुछ देर के लिए ठहर गए। चारों तरफ पानी था और उसी पानी के बीच नाव पर शादी की खुशियां आगे बढ़ रही थीं। बाढ़ की गंभीरता के बीच यह दृश्य लोगों के लिए भावुक कर देने वाला भी था और उम्मीद जगाने वाला भी।
बाढ़ के पानी के बीच हुआ निकाह
मुश्किल सफर के बाद बारात दुल्हन के घर पहुंची। इसके बाद निकाह की रस्म पूरी की गई। दोनों परिवारों के लिए यह पल इसलिए भी खास था क्योंकि प्राकृतिक आपदा के बावजूद शादी की खुशियों को बरकरार रखने में वे कामयाब रहे।
निकाह के बाद दुल्हन फरहद भी नाव पर सवार हुईं। इसके बाद दूल्हा शफीक और दुल्हन ने उसी नाव से अपने नए जीवन की शुरुआत के लिए घर की ओर सफर किया। बाढ़ के पानी के बीच नाव पर साथ बैठे नवविवाहित जोड़े का यह सफर इस शादी को हमेशा के लिए यादगार बना गया।
‘शादी का दिन तय था, इसलिए नाव से पहुंचे’
दूल्हे मोहम्मद शफीक ने बताया कि बाढ़ की वजह से काफी परेशानी है, लेकिन शादी की तारीख पहले से तय थी। सड़क मार्ग से जाना संभव नहीं था, इसलिए नाव का सहारा लिया गया। उनका कहना था कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद शादी की रस्म अच्छे से पूरी हो गई, यही सबसे बड़ी खुशी है।
परिजन जहांगीर आलम ने भी कहा कि बाढ़ के कारण परिस्थितियां कठिन हैं, लेकिन निकाह सकुशल संपन्न होने की खुशी सबसे बड़ी है। परिवार ने तमाम परेशानियों के बावजूद शादी को तय समय पर पूरा किया।
बाढ़ के बीच खुशियों की यह तस्वीर बनी मिसाल
कटिहार की यह बारात सिर्फ एक शादी का दृश्य नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में जिंदगी को आगे बढ़ाने की जिद की तस्वीर भी है। जब रास्ते पानी में डूब गए तो नाव ने मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बनाया। बाढ़ ने भले ही आवागमन रोक दिया हो, लेकिन शफीक और फरहद की जिंदगी की नई शुरुआत को नहीं रोक सकी।
चारों ओर पानी के बीच नाव पर निकली यह बारात यही संदेश देती नजर आई कि हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, जिंदगी अपनी राह तलाश ही लेती है। रास्ते डूब जाएं तो नाव सही, लेकिन खुशियों और उम्मीदों का सफर रुकना नहीं चाहिए।
निकाह के बाद वापसी में सभी बारातियों की जुबान पर एक ही बात थी कि पति-पत्नी को जिन्दगी भर याद रहेगी उनकी यह शादी।