नई दिल्ली: यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को और आसान बनाने के लिए दो नए टूल लॉन्च किए हैं। इनमें Aadhaar Face Authentication Software Development Kit (SDK) और Aadhaar Face Authentication Sandbox शामिल हैं। दोनों टूल को Global Fintech Fest 2026 में पेश किया गया।
नए SDK की मदद से बैंक, फिनटेक कंपनियां और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े अन्य संगठन अपने मौजूदा डिजिटल एप्लिकेशन में आधार फेस ऑथेंटिकेशन को सीधे जोड़ सकेंगे। इससे ग्राहकों के लिए पहचान सत्यापन की प्रक्रिया अधिक सरल और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
मोबाइल ऐप में सीधे मिलेगा फेस ऑथेंटिकेशन का विकल्प
UIDAI का नया फेस ऑथेंटिकेशन SDK उसकी फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक को सीधे नेटिव Android और iOS ऐप्स में इस्तेमाल करने की सुविधा देता है। यानी यूजर्स को पहचान सत्यापन के लिए एक ऐप से दूसरे ऐप पर जाने की जरूरत नहीं होगी।
SDK को इस तरह तैयार किया गया है कि इकोसिस्टम पार्टनर इसे अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म में आसानी से इंटीग्रेट कर सकें। इसमें AI और Machine Learning आधारित Liveness Detection तथा Anti-Spoofing तकनीक भी शामिल है, जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि ऑथेंटिकेशन के दौरान वास्तविक व्यक्ति का चेहरा इस्तेमाल किया जा रहा है।
डेटा सुरक्षा और एन्क्रिप्शन पर भी जोर
नए SDK में ऑथेंटिकेशन डेटा को सुरक्षित तरीके से संभालने और एन्क्रिप्शन का सपोर्ट दिया गया है। इसे विभिन्न प्रकार के कंज्यूमर स्मार्टफोन पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
UIDAI के मुताबिक, यह तकनीक सरकारी विभागों, बैंकों, फिनटेक कंपनियों और अन्य संस्थानों को फेस ऑथेंटिकेशन आधारित डिजिटल सेवाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद कर सकती है।
क्या है Aadhaar Face Authentication Sandbox?
SDK के साथ UIDAI ने Aadhaar Face Authentication Sandbox भी लॉन्च किया है। यह एक सुरक्षित और नियंत्रित टेस्टिंग एनवायरनमेंट है, जहां संगठन किसी सेवा को वास्तविक उपयोग में लाने से पहले पूरी फेस ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया का परीक्षण और सत्यापन कर सकते हैं।
Sandbox के जरिए डेवलपर्स और क्वालिटी एश्योरेंस टीमें यूजर प्रोविजनिंग, सहमति (Consent), फेस कैप्चर, लाइवनेस चेक, ऑथेंटिकेशन, एरर हैंडलिंग और रिस्पॉन्स वैलिडेशन जैसे अलग-अलग चरणों की जांच कर सकती हैं।
बिना अतिरिक्त बायोमेट्रिक हार्डवेयर के टेस्टिंग
इस सैंडबॉक्स की खासियत यह है कि टेस्टिंग के लिए बाहरी बायोमेट्रिक हार्डवेयर की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा डेवलपर्स अलग-अलग संभावित विफलताओं का भी परीक्षण कर सकते हैं।
इनमें अमान्य डिजिटल सिग्नेचर, नेटवर्क में रुकावट, टाइमआउट और स्पूफिंग की कोशिश जैसे परिदृश्य शामिल हैं।
UIDAI के इन दोनों नए टूल से आधार फेस ऑथेंटिकेशन को डिजिटल सेवाओं में जोड़ने की प्रक्रिया सरल होने के साथ-साथ उसके परीक्षण और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।