न्यायालय की टिप्पणी :
निचली अदालत के चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा को किया निरस्त
घाटशिला कोर्ट ने 28 जुलाई 2000 को सुनाई थी चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा
कहा- अपराध आरोपी की गलत मंशा के आधार पर स्थापित नहीं किया जा सकता
घाटशिला/रांची: घाटशिला के 26 साल पुराने आपराधिक मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि किसी महिला के घर में रात के समय घुसकर उसके कपड़े उठाना या उसे पकड़ लेना मात्र दुष्कर्म के प्रयास का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अदालत ने कहा कि दुष्कर्म के प्रयास के आरोप में दोषसिद्धि के लिए आरोपी का कृत्य स्पष्ट और ठोस रूप से उस अपराध की दिशा में आगे बढ़ा होना चाहिए।
जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव की एकल पीठ ने आरोपी की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत की ओर से धारा 376/511 के तहत दी गई चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा को निरस्त कर दिया।
हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि को धारा 354 और 452 के तहत परिवर्तित कर दिया। साथ ही आरोपी द्वारा पहले ही जेल में बिताए गए करीब आठ माह की अवधि को पर्याप्त सजा मानते हुए उसे राहत दी।
दुष्कर्म के प्रयास के लिए ठोस कदम जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म के प्रयास का अपराध केवल आरोपी की गलत मंशा के आधार पर स्थापित नहीं किया जा सकता। इसके लिए ऐसा स्पष्ट और ठोस कृत्य होना चाहिए, जो दुष्कर्म किए जाने की दिशा में पर्याप्त रूप से आगे बढ़ चुका हो।
अदालत के अनुसार, केवल महिला के कपड़े उठाना या उसे पकड़ लेना अपने आप में दुष्कर्म के प्रयास की श्रेणी में नहीं आता। हालांकि, इस घटना में आरोपी का महिला की लज्जा भंग करने और उसके घर में गैरकानूनी तरीके से प्रवेश करने का कृत्य साबित होने के आधार पर धारा 354 और 452 के तहत दोषसिद्धि कायम रखी गई।
27 दिसंबर 1999 की रात हुई थी घटना
मामला 27 दिसंबर 1999 की मध्यरात्रि का है। घाटशिला निवासी महिला अपने घर में सो रही थी। आरोप के मुताबिक, रात करीब 12 बजे आरोपी उसके कमरे में घुस आया और उसके कपड़े उठाने के साथ उसे पकड़ लिया।
महिला के शोर मचाने पर उसके परिजन और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। लोगों को आते देख आरोपी वहां से फरार हो गया। मामले में घाटशिला के अपर सत्र न्यायाधीश ने 28 जुलाई 2000 को आरोपी को धारा 376/511 के तहत दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट ने बदली दोषसिद्धि
अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के प्रयास से संबंधित दोषसिद्धि को हटाते हुए आरोपी को धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने का दोषी माना। वहीं, घर में गैरकानूनी तरीके से प्रवेश करने के मामले में धारा 452 के तहत निचली अदालत की दोषसिद्धि को बरकरार रखा।
आठ माह की सजा को माना पर्याप्त
सजा के सवाल पर अदालत ने आरोपी के पूर्व रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखा। अदालत ने माना कि आरोपी का यह पहला अपराध था और उसका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया। साथ ही घटना को 26 साल से अधिक समय बीत चुका है और आरोपी पहले ही करीब आठ माह जेल में रह चुका है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा को उसके द्वारा पहले ही भुगती जा चुकी अवधि तक सीमित कर दिया। इस तरह करीब आठ माह की जेल की सजा को पर्याप्त मानते हुए उसे मामले में राहत दी गई।