पोटका : झारखंड में खनिज संसाधनों और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दे को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने एमएमडीआर (खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन)) संशोधन विधेयक के खिलाफ जनजागरण अभियान तेज कर दिया है। केंद्रीय कमेटी के निर्देश पर सोमवार को पोटका प्रखंड के उदाल गांव में विधायक संजीव सरदार ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर अभियान चलाया।
इस दौरान विधायक ने ग्रामीणों को एमएमडीआर संशोधन विधेयक के प्रावधानों और इसके संभावित प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने लोगों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और जनहित से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की अपील की।
गांव-गांव और टोला-टोला पहुंचेगा झामुमो
संजीव सरदार ने कहा कि केंद्रीय कमेटी ने झामुमो के सभी कार्यकर्ताओं को गांव, टोला और मोहल्ले तक पहुंचकर संशोधित विधेयक के बारे में लोगों को जानकारी देने का निर्देश दिया है। इसी के तहत पार्टी कार्यकर्ता व्यापक स्तर पर जनजागरण अभियान चला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विरोध का विषय नहीं है, बल्कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों, आर्थिक अधिकारों और भविष्य से जुड़ा मामला है। इसलिए आम लोगों को इसके विभिन्न पहलुओं की जानकारी होना जरूरी है।
खनिज राजस्व प्रभावित होने पर विकास पर पड़ेगा असर
विधायक ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और खनिजों से मिलने वाला राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि राज्य के अधिकारों और राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो इसका असर विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे विधेयक के प्रावधानों को समझें और अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें।
केंद्र से बकाये का मुद्दा भी उठाया
संजीव सरदार ने कहा कि झारखंड पहले से ही केंद्र से करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का मुद्दा उठा रहा है। उनका आरोप है कि यदि राज्य के खनिज और राजस्व संबंधी अधिकारों को और कमजोर किया गया तो इसका असर पुराने बकाये की प्राप्ति के साथ-साथ भविष्य के राजस्व पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य के आर्थिक संसाधनों पर दबाव बढ़ने का अंतिम असर आम जनता और गरीब परिवारों पर पड़ सकता है।
जनकल्याणकारी योजनाओं पर असर की जताई आशंका
विधायक ने कहा कि राज्य की आय और संसाधन मजबूत रहना जरूरी है, क्योंकि इन्हीं के माध्यम से मइया सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, छात्रवृत्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और ग्रामीण विकास जैसी योजनाओं को संचालित किया जाता है।
उनके मुताबिक, यदि राज्य के राजस्व संसाधनों पर असर पड़ता है तो इसका प्रभाव विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर भी देखने को मिल सकता है।
महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना
संजीव सरदार ने महंगाई को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल से लेकर खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा कि जब जनता पहले से महंगाई की मार झेल रही है, ऐसे में राज्य के आर्थिक संसाधनों पर किसी तरह का दबाव बढ़ना आम लोगों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन सकता है।
जरूरत पड़ी तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
विधायक ने कहा कि झारखंड की पहचान जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के संघर्ष से जुड़ी रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के अधिकारों को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि फिलहाल पार्टी का जोर जनजागरण के माध्यम से लोगों को पूरे मामले की जानकारी देने पर है। जरूरत पड़ने पर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा और झारखंड के लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर सड़क पर उतरेंगे।
अभियान के दौरान ग्रामीणों से एमएमडीआर संशोधन विधेयक के मुद्दे पर जागरूक रहने और जनहित से जुड़े विषयों पर सामूहिक रूप से आवाज उठाने की अपील की गई।