August 10, 2026
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जमशेदपुर

JIADA Regulations 2026: उद्योग संगठनों के साथ बैठक, जमीन आवंटन से लेकर ट्रांसफर और बीमार इकाइयों के पुनरुद्धार पर बनी सहमति

JIADA Regulations 2026: उद्योग संगठनों के साथ बैठक, जमीन आवंटन से लेकर ट्रांसफर और बीमार इकाइयों के पुनरुद्धार पर बनी सहमति

जमशेदपुर: JIADA Regulations 2026 के प्रस्तावित मसौदे को लेकर रविवार को उद्योग एवं व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में JIADA के प्रबंध निदेशक (MD) वरुण रंजन, IAS अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। उन्होंने प्रस्तावित नियमों के विभिन्न प्रावधानों पर उद्योग प्रतिनिधियों से विस्तार से चर्चा की और उनके सुझाव सुने।

बैठक में उद्योगों को जमीन आवंटन, भूमि दर, स्वामित्व हस्तांतरण, ज्वाइंट वेंचर, सब-लीज, बैंक मॉर्गेज, विलय-विभाजन और बीमार इकाइयों के पुनरुद्धार समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। उद्योग संगठनों ने प्रस्तावित नियमों को सरल, पारदर्शी और Ease of Doing Business के अनुरूप बनाने पर जोर दिया।

पुराने आवंटियों को मिलेगा Deemed IOP का लाभ

बैठक में वर्ष 2016 के नियमों के तहत आवंटित उन औद्योगिक इकाइयों का मुद्दा प्रमुखता से उठा, जो उत्पादन में हैं लेकिन उनका DOP/IOP औपचारिक रूप से दर्ज नहीं हुआ है। ऐसे आवंटियों को अधिसूचना जारी होने की तारीख से छह महीने के भीतर IOP के लिए आवेदन करने का अवसर देने का प्रस्ताव है।

बिजली खपत, GSTN रिटर्न और EPFO रिकॉर्ड के आधार पर Deemed IOP प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा। इससे संबंधित इकाइयों को Performing Allottee Certification, नवीनीकरण और कम Penal Rent जैसे लाभ मिल सकेंगे। हालांकि, पहले से बकाया राशि की माफी का प्रावधान नहीं होगा।

निवेश के आधार पर औद्योगिक क्षेत्रों का वर्गीकरण

प्रस्तावित नियमों में औद्योगिक क्षेत्रों को निवेशकों की मांग के आधार पर चार श्रेणियों—Saturated, Active, Emerging और Priority Zone—में बांटने की व्यवस्था है। इसका सीधा असर भूमि की कीमत पर पड़ेगा।

राजमार्ग के किनारे स्थित भूखंडों को Prime Plot के रूप में A+, A, B+ और B ग्रेड में वर्गीकृत करने का प्रस्ताव है। इन भूखंडों पर Base Price के ऊपर क्रमशः 20, 15, 10 और 5 प्रतिशत तक प्रीमियम लिया जा सकेगा। ऐसे भूखंडों का आवंटन प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर करने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

भूखंड आरक्षण में 40 प्रतिशत हिस्सा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए रखा जाएगा। इसके अलावा PAF, SC/ST उद्यमियों और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए 10-10 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव है।

JIADA Charges में 12 प्रतिशत शुल्क का प्रस्ताव

भूमि आवंटन की कीमत में Land Lease Premium के अतिरिक्त JIADA Charges के रूप में LLP का 12 प्रतिशत शुल्क प्रस्तावित है। इसमें Institutional Charge 7 प्रतिशत, Processing Charge 3 प्रतिशत और Investor Facilitation Charge 2 प्रतिशत शामिल होगा। यह शुल्क निश्चित और गैर-रियायती होगा।

Land Rent और Maintenance Charge में हर वर्ष स्वतः पांच प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव है। वहीं भूमि लागत पर संचयी छूट की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत रखने पर भी चर्चा हुई।

विज्ञापन से पहले जरूरी होंगी बुनियादी सुविधाएं

नए नियमों के तहत किसी भूखंड का विज्ञापन जारी करने से पहले सड़क, नाली और सीमांकन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए Possession Readiness Certificate भी जरूरी होगा।

जल और विद्युत जैसी उन्नत सुविधाओं को 24 महीने के भीतर पूरा करने का प्रस्ताव रखा गया है।

कंपनी में हिस्सेदारी बदलने के लिए नई व्यवस्था

स्वामित्व या कंपनी की संरचना में बदलाव के लिए भी अलग-अलग प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। यदि मूल आवंटी की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत या उससे अधिक बनी रहती है तो केवल 10 हजार रुपये की प्रोसेसिंग फीस के साथ सूचना देना पर्याप्त होगा।

25 से 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदलाव पर प्रचलित LLP का पांच प्रतिशत शुल्क और MD की पूर्व स्वीकृति जरूरी होगी। वहीं 50 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सेदारी के हस्तांतरण को Transfer माना जाएगा।

निर्धारित समय पर सूचना नहीं देने पर 10 हजार से दो लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है।

पहली बार Joint Venture और Sub-Lease को नियमों में जगह

JIADA के इतिहास में पहली बार Joint Venture, Sub-Lease और Sick Units Revival जैसी व्यवस्थाओं को प्रस्तावित Regulations में शामिल किया जा रहा है। इससे उद्योगों को पूंजी जुटाने, साझेदारी करने और बंद या बीमार इकाइयों को दोबारा शुरू करने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

Joint Venture के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था प्रस्तावित है। Tier-A में 26 प्रतिशत तक इक्विटी पर केवल प्रोसेसिंग फीस के आधार पर पोस्ट-अप्रूवल की व्यवस्था होगी।

Tier-B में 26 से 49 प्रतिशत इक्विटी के लिए MD की पूर्व स्वीकृति जरूरी होगी। इसके साथ IOP के बाद के वर्षों के आधार पर LLP का 10, 7, 5 या 3 प्रतिशत JV Fee प्रस्तावित है। Technology Transfer, Export-oriented, रोजगार-सघन और Sick Unit Revival से जुड़े Joint Venture में 15 प्रतिशत से लेकर पूर्ण शुल्क छूट तक का प्रावधान रखा गया है।

Tier-C में 50 प्रतिशत या उससे अधिक इक्विटी को सीधे Transfer माना जाएगा और उस पर Transfer Fee लागू होगी।

Sub-Lease के लिए Capacity Gate की शर्त

प्रस्तावित Sub-Lease व्यवस्था के तहत निर्मित क्षेत्र के 10 प्रतिशत तक हिस्से को बिना शुल्क केवल सूचना देकर सब-लीज किया जा सकेगा। 30 प्रतिशत तक क्षेत्र के लिए अनुमति के साथ वार्षिक भाड़े का पांच प्रतिशत शुल्क प्रस्तावित है।

Managed Industrial Estate के मामले में बोर्ड की मंजूरी के साथ पांच प्रतिशत शुल्क का प्रावधान होगा। इसके अलावा इकाई को न्यूनतम 60 प्रतिशत उत्पादन क्षमता यानी Capacity Gate की शर्त पूरी करनी होगी।

प्रतिबंधित गतिविधियों में सब-लीज करने पर तत्काल आवंटन निरस्त करने और दंड की कार्रवाई का प्रस्ताव है।

जमीन हस्तांतरण पर Transfer Fee में छूट

मानक Transfer के लिए Transfer Price का 15 प्रतिशत शुल्क प्रस्तावित किया गया है। इसमें तीन वर्ष तक कोई छूट नहीं होगी। तीन से 10 वर्ष के बीच 85 प्रतिशत और 10 वर्ष से अधिक अवधि में 70 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान रहेगा।

गैर-कार्यरत इकाई के लिए 50 प्रतिशत शुल्क, जबकि Performing Allottee को अतिरिक्त पांच प्रतिशत छूट देने का प्रस्ताव है। समूह के भीतर हस्तांतरण के मामले में शुल्क केवल पांच प्रतिशत रखा गया है।

विलय और विभाजन के मामले में समान प्रमोटर समूह होने पर एक प्रतिशत Merger Fee का प्रस्ताव है, जबकि नियंत्रण में बदलाव होने पर पूरी Transfer Fee लागू होगी।

बैंक से ऋण लेने के लिए Mortgage की सुविधा

आवंटी अपने पट्टाधृत अधिकारों को केवल अनुसूचित बैंकों या RBI से मान्यता प्राप्त संस्थानों के पास ही गिरवी रख सकेंगे। इसके लिए JIADA की ओर से NOC 15 कार्य दिवसों के भीतर जारी करने का प्रस्ताव है।

JIADA का बकाया हमेशा प्रथम प्रभार रहेगा। ऋण चूक की स्थिति में JIADA को 30 दिनों के भीतर Right of First Refusal का अधिकार देने का प्रस्ताव रखा गया है।

गतिविधि बदलने पर तय शुल्क

औद्योगिक इकाई की गतिविधि में बदलाव के लिए भी शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव है। छोटे बदलाव के लिए पांच हजार रुपये, बड़े बदलाव के लिए 25 हजार रुपये और पूर्ण रूपांतरण के लिए दो लाख रुपये शुल्क प्रस्तावित है।

Sick Units Revival से बंद उद्योगों को राहत

बीमार इकाइयों के पुनरुद्धार के लिए नई योजना प्रस्तावित की गई है। इसके तहत Sick घोषित इकाइयों को 12 महीने की अवधि दी जाएगी। संतोषजनक प्रगति होने पर इसे बढ़ाकर 24 महीने तक किया जा सकेगा।

इस अवधि के दौरान Penal Rent की पूरी माफी का प्रस्ताव है। विलय पर पांच प्रतिशत रियायती शुल्क, हस्तांतरण शुल्क में 25 प्रतिशत छूट और मूल बकाया के 80 प्रतिशत पर One-Time Settlement की सुविधा प्रस्तावित है। साथ ही विलंबित ब्याज की पूरी माफी का प्रावधान रखा गया है।

इस योजना का उद्देश्य बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को दोबारा उत्पादन में लाना और औद्योगिक क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

औद्योगिक क्षेत्रों में 55 प्रतिशत भूमि उद्योगों के लिए

भूमि नियोजन के तहत औद्योगिक क्षेत्रों में कम से कम 55 प्रतिशत भूमि औद्योगिक भूखंडों के लिए आरक्षित रखने का प्रस्ताव है। वहीं कम से कम 10 प्रतिशत क्षेत्र Green Zone के रूप में रखा जाएगा।

भविष्य की औद्योगिक भूमि जरूरतों को पूरा करने के लिए Land Expansion Corpus Fund बनाने का भी प्रस्ताव है। इसे आवंटन शुल्क से वित्तपोषित किया जाएगा।

उद्योग संगठनों ने नियमों को सरल बनाने पर दिया जोर

बैठक में उद्योग संगठनों ने कहा कि JIADA Regulations 2026 को उद्योगों के लिए सरल, स्पष्ट और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से Joint Venture, Sub-Lease, Transfer, Merger और Mortgage से जुड़े शुल्कों में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई।

SCCI ने कहा कि JIADA के नियम ऐसे होने चाहिए, जो उद्योगों के विस्तार और नए निवेश को प्रोत्साहित करें तथा अनावश्यक प्रक्रियागत जटिलताओं को कम करें।

सुझावों को अंतिम नियमों में शामिल करने का आश्वासन

JIADA के MD वरुण रंजन, IAS ने उद्योग प्रतिनिधियों की ओर से दिए गए सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि Regulations को अंतिम रूप देते समय सभी व्यावहारिक सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

बैठक सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई। दोनों पक्षों ने लगातार संवाद के माध्यम से औद्योगिक विकास को गति देने पर सहमति जताई।

बैठक में JIADA के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन, Regional Deputy Director दिनेश रंजन समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। SCCI की ओर से अध्यक्ष मानव केडिया, उपाध्यक्ष हर्ष बकरेवाल और सचिव विनोद शर्मा शामिल हुए। इसके अलावा ASIA, Laghu Udyog Bharati, ISRO और FJCCI के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

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