July 24, 2026
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जमशेदपुर

जमशेदपुर पार्वती घाट में बड़ी पहल: पर्यावरण अनुकूल फरनेस, ‘देव आत्मा उद्यान’ और नवीनीकृत सुविधाओं का शुभारंभ

जमशेदपुर पार्वती घाट में बड़ी पहल: पर्यावरण अनुकूल फरनेस, ‘देव आत्मा उद्यान’ और नवीनीकृत सुविधाओं का शुभारंभ


  • अंतिम संस्कार व्यवस्था को अधिक स्वच्छ, व्यवस्थित और मानवीय बनाने की दिशा में कदम
  • समाजसेवियों और दानदाताओं के सहयोग से साकार हुईं नई परियोजनाएं

जमशेदपुर। शहर के प्रमुख अंतिम संस्कार स्थलों में शामिल पार्वती घाट में नागरिकों की सुविधा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कई नई व्यवस्थाओं की शुरुआत की गई है।

पार्वती घाट समिति ने 6 जून से तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आम लोगों के लिए समर्पित किया है, जिनमें पर्यावरण अनुकूल लकड़ी आधारित फरनेस, नवजात एवं पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष ‘देव आत्मा उद्यान’ तथा शौचालय एवं स्नानागार परिसर ‘पवित्र निकेतन’ का नवीनीकरण शामिल है।

समिति के अनुसार पार्वती घाट में स्थापित नया लकड़ी आधारित फरनेस पारंपरिक व्यवस्था की तुलना में काफी कम लकड़ी की खपत करता है।

इस आधुनिक प्रणाली में लगभग 100 किलोग्राम लकड़ी में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। साथ ही धुएं के निष्कासन के लिए चिमनी की विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे प्रदूषण में कमी आती है और परिसर का वातावरण अधिक स्वच्छ बना रहता है।

इस परियोजना के लिए समाजसेवी कृष्ण मुरारी गुप्ता ने 11 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग प्रदान किया है।

पार्वती घाट परिसर में विकसित ‘देव आत्मा उद्यान’ भी एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल के रूप में सामने आया है।

यह उद्यान हिंदू रीति-रिवाजों के अनुरूप नवजात शिशुओं तथा पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों के अंतिम संस्कार के लिए तैयार किया गया है।

परिसर में छह अलग-अलग सीमांकित क्षेत्र बनाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक में लगभग 80 बच्चों के दफन की व्यवस्था की गई है।

इस परियोजना को मूर्त रूप देने में कई दानदाताओं ने पांच-पांच लाख रुपये का योगदान दिया है।

इनमें रतनलाल, नवीन एवं नीरज अग्रवाल, अनिल एवं तुषित अग्रवाल, महेश अग्रवाल, खुशमन भाई उदाणी, उमा नाथूलाल, आशा एवं नवीन पोद्दार तथा मंजू देवी, राहुल एवं विशाल साव प्रमुख हैं।

इसी क्रम में पार्वती घाट स्थित शौचालय एवं स्नानागार परिसर ‘पवित्र निकेतन’ का भी व्यापक नवीनीकरण कराया गया है।

इस कार्य के लिए निर्मल भाई पांड्या ने पांच लाख रुपये का योगदान दिया, जिसके लिए समिति ने उनके प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है।

पार्वती घाट समिति का कहना है कि समाज के विभिन्न वर्गों और दानदाताओं के सहयोग से अंतिम संस्कार से जुड़ी सुविधाओं को अधिक सम्मानजनक, स्वच्छ और सुव्यवस्थित बनाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है।

समिति ने सभी सहयोगकर्ताओं और दानदाताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके योगदान से ही जनहित की ऐसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं साकार हो पा रही हैं।

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