- अंतरराष्ट्रीय शेक्सपियर महोत्सव 2026 में संताली भाषा की गूंज
- ओल चिकी लिपि के शताब्दी वर्ष में वैश्विक मंच पर जनजातीय संस्कृति का ऐतिहासिक प्रदर्शन
नई दिल्ली/जमशेदपुर। झारखंड की लौहनगरी जमशेदपुर (आदित्यपुर) की बेटी संजना सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय जनजातीय संस्कृति का परचम लहराकर पूरे देश को गौरवान्वित किया है।

रोमानिया के क्रायोवा शहर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शेक्सपियर महोत्सव 2026 में संताली भाषा में शेक्सपियर के विश्वप्रसिद्ध नाटकों का मंचन करने वाली छात्र टीम में शामिल संजना हाल ही में स्वदेश लौटीं।

भारत लौटने के बाद उन्हें और उनके साथियों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का अवसर भी मिला।
जमशेदपुर के आदित्यपुर स्थित आदित्य सिंडिकेट कॉलोनी निवासी संजना सिंह वर्तमान में केआईआईटी विश्वविद्यालय में चौथे वर्ष की छात्रा हैं।
उनके पिता उपेंद्र कुमार सिंह उद्योगपति हैं, जबकि माता शोभा सिंह पत्रकार हैं।
झारखंड से इस अंतरराष्ट्रीय दल में शामिल होने वाली वह एकमात्र छात्रा थीं।
दो महीने तक रोमानिया में रहा भारतीय छात्र दल
केआईआईटी और किस के 20 छात्रों का यह प्रतिनिधिमंडल केए-171 स्टूडेंट मोबिलिटी कार्यक्रम के तहत एक अप्रैल से 31 मई 2026 तक रोमानिया में रहा।
इस दौरान विद्यार्थियों ने अकादमिक अध्ययन, सांस्कृतिक इंटर्नशिप और अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रमों में भाग लेते हुए भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया।
संताली भाषा में मंचित हुए शेक्सपियर के कालजयी नाटक
इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारतीय छात्रों ने विलियम शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटकों का संताली भाषा में मंचन किया। ‘रोमियो-जूलियट’, ‘हैमलेट’ और ‘मैकबेथ’ जैसी कालजयी रचनाओं की संताली प्रस्तुति ने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दुनिया के विभिन्न देशों से आए शिक्षाविदों, कलाकारों और शोधकर्ताओं ने इस अनूठे प्रयास की खुलकर सराहना की।
ओल चिकी लिपि के शताब्दी वर्ष में रचा गया नया इतिहास
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि संताली भाषा की ओल चिकी लिपि अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर पहली बार शेक्सपियर के नाटकों को संताली भाषा में अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया, जिसने भारतीय जनजातीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने का काम किया।
पहली बार यूरोप में गूंजा संताली नृत्य और संस्कृति का स्वर
किस के छात्रों के लिए यह अनुभव और भी खास रहा।
इससे पहले वे मुख्य रूप से खेल प्रतियोगिताओं के लिए विदेश जाते रहे थे, लेकिन पहली बार किसी यूरोपीय देश में उन्होंने संताली नृत्य, लोक परंपराओं और जनजातीय संस्कृति का प्रदर्शन किया।
महोत्सव में 30 देशों के 150 से अधिक छात्र तथा 71 विश्वविद्यालयों से जुड़े तीन हजार से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सराहा सांस्कृतिक योगदान
भारत लौटने के बाद छात्र दल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार भेंट की।
इस दौरान विद्यार्थियों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय शेक्सपियर महोत्सव में संताली भाषा के माध्यम से भारतीय संस्कृति को मिली वैश्विक पहचान की जानकारी दी।
राष्ट्रपति ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ऐसे अवसर युवा प्रतिभाओं को दुनिया के सामने अपनी संस्कृति और क्षमता प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करते हैं।
रोमानियाई दूतावास में भी हुई विशेष प्रस्तुति
नई दिल्ली स्थित रोमानियाई दूतावास के सहयोग से आयोजित विशेष समारोह में भी छात्रों ने संताली भाषा में अपने नाटकों का मंचन किया।
इस कार्यक्रम में कई देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और राजधानी की प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं।
आयोजन को सांस्कृतिक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण माना गया।
संस्थापक अच्युत सामंत ने दी शुभकामनाएं
केआईआईटी और किस के संस्थापक अच्युत सामंत ने छात्रों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता केवल संस्थानों की नहीं, बल्कि ओडिशा, झारखंड और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने भारतीय जनजातीय संस्कृति को विश्व मंच तक पहुंचाकर नई मिसाल कायम की है।
संजना बोलीं- जीवन का सबसे यादगार अनुभव
जमशेदपुर लौटने पर संजना सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि रोमानिया में भारत और संताली संस्कृति का प्रतिनिधित्व करना उनके जीवन का सबसे गौरवपूर्ण और यादगार क्षण रहा।
उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर अपनी जड़ों से जुड़ी संस्कृति को प्रस्तुत करने का अवसर मिलना किसी सपने के सच होने जैसा है।
संजना ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार के निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग को दिया।
