September 8, 2026
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जमशेदपुर

झारखंड के चांडिल में छठ घाट पर दर्दनाक हादसा, 14 वर्षीय आर्यन यादव की मौत, दो श्रद्धालु अब भी लापता

झारखंड के चांडिल में छठ घाट पर दर्दनाक हादसा, 14 वर्षीय आर्यन यादव की मौत, दो श्रद्धालु अब भी लापता

संध्या अर्घ्य के दौरान नदी में डूबे तीन लोग, तेज धारा में बह गए

गोताखोरों की टीम जुटी, इलाके में शोक की लहर

चांडिल/ जमशेदपुर। लोकआस्था के सबसे बड़े पर्व छठ पूजा की संध्या को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक खबर ने पूरे झारखंड को स्तब्ध कर दिया है।

राज्य के सरायकेला खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र के शहरबेड़ा विश्वास भट्टा नदी घाट पर रविवार की शाम संध्या अर्घ्य के दौरान तीन श्रद्धालु नदी में डूब गए। इस हादसे में 14 वर्षीय आर्यन यादव की मौत हो गई है, जबकि 45 वर्षीय संजय सिंह और 19 वर्षीय प्रतीक कुमार अब तक लापता हैं।
दोनों की तलाश के लिए गोताखोरों की टीम लगातार नदी में सर्च ऑपरेशन चला रही है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार की शाम घाट पर भारी भीड़ थी। लोग सूर्य को अर्घ्य देने के लिए नदी में खड़े थे।
इसी दौरान आर्यन यादव नदी में स्नान करने उतरा, लेकिन उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया।
उसे बचाने के लिए संजय सिंह और प्रतीक कुमार ने भी छलांग लगाई, पर तेज बहाव में तीनों बह गए।

कुछ ही पलों में खुशियों और भक्ति से भरा माहौल चीख-पुकार में बदल गया। लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन जब तक गोताखोरों और स्थानीय लोगों ने खोजबीन शुरू की, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
काफी मशक्कत के बाद आर्यन यादव को नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही चांडिल थाना पुलिस, राजस्व कर्मी और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची।
रातभर नदी में सर्च ऑपरेशन जारी है, लेकिन अब तक संजय सिंह और प्रतीक कुमार का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं से सुरक्षा घेरे से बाहर न जाने और बच्चों को नदी के गहरे हिस्सों में न उतरने की अपील की है।

जिस घाट पर हर साल छठ गीतों की गूंज होती है, वहाँ अब रोने-बिलखने की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं।
आर्यन यादव के परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
जहाँ एक ओर लोग भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी में जुटे हैं, वहीं शहरबेड़ा घाट पर श्रद्धालु सूर्य से दुआ कर रहे हैं कि लापता दोनों को सुरक्षित निकाला जाए।

छठ की पवित्रता और भक्ति के बीच यह हादसा पूरे इलाके के लिए गहरे दुख का कारण बन गया है।
लोग कह रहे हैं — “भगवान सूर्य से जीवन की कामना की थी, लेकिन आज घाट ने जिंदगी छीन ली।”

स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने कहा कि घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे।
न तो सुरक्षा रस्सी थी और न ही पर्याप्त गोताखोर।
लोगों ने प्रशासन से हर वर्ष छठ पर्व पर घाटों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है ताकि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।

सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन ने कहा है कि राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और गोताखोर लगातार नदी में तलाशी ले रहे हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे घबराएँ नहीं, अफवाहों से दूर रहें और बचाव टीम की मदद करें।

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