July 27, 2026
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जमशेदपुर

साेनारी में कुत्ते की निकली शवयात्रा, अंतिम यात्रा में रोने लगा पूरा परिवार

साेनारी में कुत्ते की निकली शवयात्रा, अंतिम यात्रा में रोने लगा पूरा परिवार

जमशेदपुर : इंसान और कुत्तों के बीच प्रेम का उदाहरण आपने कई बार देखा होगा। आपने ऐसी कई कहानियां भी सुनी होगी। बॉलीवुड में फिल्म भी बन चुकी है। ऐसा ही एक उदाहरण जमशेदपुर के सोनारी क्षेत्र में देखने को मिला। एक अनोखी शव यात्रा ने बरबस ही मानवीय संवेदनाओं को संबल प्रदान किया है।

जी हां, बुधवार को जमशेदपुर के सोनारी बाल बिहार से पालतू श्वान लोपो की शव यात्रा पूरे विधि विधान के साथ निकली, जहां पालतू श्वान लोपों को उसके घर वालों ने नाम आंखों से विदाई दी। लोपो को फागु बाबा कब्रिस्तान में दफनाया गया।

यह शव यात्रा किसी इंसान की नहीं बल्कि एक पालतू श्वान लोपो चक्रवर्ती की थी, जो सोनारी बाल बिहार के रहने वाले प्रवीण कुमार चक्रवर्ती के परिवार का एक हिस्सा था। लोपो पिछले 8 वर्षों से प्रवीण कुमार चक्रवर्ती के परिवार के सभी सदस्यों के साथ रहकर परिवार के सुख-दुख- में शामिल रहता था। पिछले कुछ दिनों से लोपो बीमार था। पालतू श्वान लोपो के मालिक प्रवीण चक्रवर्ती ने उसके इलाज पर हजारों रुपये खर्च किए पर भगवान को कुछ और मंजूर था। बुधवार सुबह लोपो ने अंतिम सांस ली। डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित करने के बाद पूरे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। प्रवीण चक्रवर्ती, उनकी पत्नी एवं बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल था। प्रवीण चक्रवर्ती के द्वारा अपने श्वान लोपो का अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज के साथ किया गया। उसकी शव यात्रा में परिवार के सभी सदस्य शामिल हुए और सोनारी के फागु बाबा कब्रिस्तान में उसे दफना दिया गया। मीडिया से बात करते हुए प्रवीण चक्रवर्ती एवं उनकी पत्नी अंजना चक्रवर्ती ने कहा कि लोपो को हमने अपना नाम दिया। उसे हमने अपनी संतान की तरह पालकर बड़ा किया था। पिछले 8 वर्षों से हमारे परिवार का एक सदस्य बनकर हमारे साथ रह रहा था। हमलोगों ने कभी भी अपने बेटा बेटी और लोपो में कोई फर्क नहीं समझा।आज वह हमारे बीच नहीं है। उन्होंने बताया कि हिंदू रीति रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार किया और पूरे विधि विधान से श्राद्धकर्म भी करेंगे।

इससे पहले शव यात्रा में शामिल प्रवीण चक्रवर्ती की बेटी इशिता ने कहा कि लोपो मेरे भाई के जैसा था। जो एहसास हमें अपनों के खोने पर होता है वही एहसास आज मैं उसकी मौत के बाद महसूस कर रही हूं। हम लोगों से यही कहना चाहेंगे कि वह जानवरों से प्यार करें उन्हें भी जीने का अधिकार है। बहरहाल इशिता का संदेश काबिलेतारीफ है।

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