August 28, 2026
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शाह की अंबेडकर टिप्पणी पर पूर्व मंत्री गुप्ता ने कड़ी आलोचना की

शाह की अंबेडकर टिप्पणी पर पूर्व मंत्री गुप्ता ने कड़ी आलोचना की

संविधान निर्माता पर ‘अपमानजनक’ टिप्पणियों पर माफी और इस्तीफे की मांग

प्रमुख बिंदु:

  • पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने अंबेडकर पर शाह की विवादित टिप्पणी की आलोचना की
  • भाजपा के रुख को दलित विरोधी बताया, अंबेडकर प्रतिमा पर सार्वजनिक माफी की मांग की
  • दावों की संवैधानिक ढांचे को बदलने की भाजपा की मंशा को उजागर करती हैं

जमशेदपुर- पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता डॉ. बीआर अंबेडकर के बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कथित अपमानजनक टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए तत्काल माफी और इस्तीफे की मांग की गई।

गुप्ता ने प्रेस बयान जारी कर कड़ी फटकार लगाई। इस दौरान उन्होंने सामाजिक समानता स्थापित करने में अंबेडकर की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। इस विवाद ने संवैधानिक मूल्यों के बारे में व्यापक बहस छेड़ दी है।

ऐतिहासिक संदर्भ

डॉ. अम्बेडकर ने 1949 में भारत का संवैधानिक ढांचा तैयार किया। इसके अलावा, उन्होंने सभी समुदायों के लिए सामाजिक न्याय और समानता का समर्थन किया। उनका योगदान संवैधानिक कानून से परे सामाजिक सुधारों तक फैला हुआ है।

राजनीतिक निहितार्थ

भाजपा के रुख की विभिन्न हलकों से आलोचना हुई है। एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “ये संविधान के प्रति उनके असली इरादों को उजागर करती हैं।” इसके अलावा, विपक्षी नेता बयानों की निंदा करने में एकजुट हो गए हैं।

जवाबदेही की मांग

गुप्ता ने जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने शाह से अंबेडकर की प्रतिमा पर माफी मांगने को कहा। पूर्व मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की टिप्पणियां भारत के संवैधानिक ढांचे को कमजोर करती हैं।

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