रांची: झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच कर रही सीआईडी को कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। मामले में गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद एबाद से पूछताछ के दौरान परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेरफेर से जुड़े कई अहम तथ्यों का पता चला है। उसके बयान के आधार पर जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क के संभावित मास्टरमाइंड और दूसरे आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
सीआईडी की जांच में अतुल वत्स का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे और उनके बीच किस तरह का नेटवर्क काम कर रहा था।
OMR और OSM शीट में हेरफेर की जांच
पूछताछ के दौरान मोहम्मद एबाद ने परीक्षा की OMR और OSM शीट में कथित तौर पर छेड़छाड़ किए जाने की जानकारी दी है। जांच के अनुसार, परीक्षा में अभ्यर्थियों के उत्तरों और परिणामों को प्रभावित करने के लिए एक संगठित नेटवर्क के काम करने की आशंका है।
सीआईडी के सामने आए तथ्यों के आधार पर अतुल वत्स और मिथिलेश सिंह की भूमिका की जांच की जा रही है। एजेंसी को ऐसे संकेत मिले हैं कि यह गतिविधि किसी एक-दो लोगों तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई लोगों का नेटवर्क इसके पीछे सक्रिय हो सकता है।
जांच में करीब 16 लोगों के एक कथित सिंडिकेट का जिक्र सामने आया है। इसमें रामबीर सिंह, अरविंद कुमार, राजेश सिंह, आदित्य पांडेय, सुनील कुमार, संतोष सिंह, ब्रजेश कुमार, अली, इमरान, अजय संग्राम सिंह, प्रमोद पाठक, कृष्णा यादव और मोहम्मद उस्मान समेत अन्य लोगों के नाम जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। सीआईडी इन सभी की भूमिका और आपसी संपर्कों की जांच कर रही है।
कई भर्ती परीक्षाओं से जुड़ाव की पड़ताल
अतुल वत्स का नाम इससे पहले उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में भी सामने आ चुका है। तमाड़ पुलिस ने उसे 164 अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस की ओर से उसे कथित सॉल्वर नेटवर्क का प्रमुख बताया गया था।
अब सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इसी नेटवर्क का संबंध JPSC या JSSC की अन्य भर्ती परीक्षाओं से भी रहा है। इसके लिए पुराने परीक्षा मामलों, आरोपियों के संपर्क, आर्थिक लेन-देन और परीक्षा से जुड़े लोगों के बीच संभावित कनेक्शन की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी को यह भी पता चला है कि अतुल वत्स के खिलाफ दूसरे राज्यों में आयोजित प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले रहे हैं।
इनमें राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा 2017, NEET पेपर लीक 2024, बिहार CHO भर्ती 2024, उत्तर प्रदेश RO/ARO परीक्षा और यूपी सिपाही भर्ती परीक्षा 2024 जैसे मामले शामिल बताए जा रहे हैं। इन मामलों और झारखंड की भर्ती परीक्षाओं के बीच किसी तरह का संबंध है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
अभय तिवारी के आर्थिक नेटवर्क की भी जांच
भर्ती परीक्षा कथित धांधली मामले की जांच में अभय तिवारी से जुड़े आर्थिक लेन-देन और संपत्तियों की जानकारी भी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि अभय तिवारी TDPL कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत था।
सीआईडी को संदेह है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं से अर्जित रकम को अलग-अलग कारोबारी गतिविधियों और निवेश के जरिए खपाने की कोशिश की गई। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए कितनी रकम का लेन-देन हुआ और उसे किन माध्यमों से दूसरे कारोबारों में लगाया गया।
जांच के दौरान बैंक खातों, संपत्तियों, निवेश और कारोबारी गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आर्थिक नेटवर्क की जांच से कथित भर्ती घोटाले में शामिल लोगों के बीच पैसों के लेन-देन की कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।
सीआईडी खंगाल रही पूरे नेटवर्क की कड़ियां
JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच अब केवल परीक्षा में हुई अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गई है। सीआईडी संभावित सॉल्वर नेटवर्क, परीक्षा से जुड़े लोगों, OMR/OSM शीट में कथित हेरफेर, आरोपियों के आपसी संपर्क और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित नेटवर्क ने कितनी परीक्षाओं को प्रभावित किया और इसमें कितने अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया। आने वाले दिनों में पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के आधार पर मामले में और नाम सामने आने की संभावना है।