मुंबई : देश की प्रमुख एकीकृत बिजली कंपनियों में शामिल Tata Power और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (IIT Bombay) ने अगली पीढ़ी की ऊर्जा तकनीकों और उन्नत स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की है। दोनों संस्थानों ने इसके लिए मास्टर रिसर्च एग्रीमेंट (MRA) पर हस्ताक्षर किए हैं।
IIT Bombay परिसर में आयोजित कार्यक्रम में समझौते पर Tata Power के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक डॉ. प्रवीर सिन्हा और IIT Bombay के डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रो. श्रीकृष्ण वी. कुलकर्णी ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान IIT Bombay के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे भी मौजूद रहे।
स्मार्ट ग्रिड से लेकर AI और एनर्जी स्टोरेज तक पर होगा काम
इस साझेदारी के तहत IIT Bombay की शोध क्षमता और Tata Power के औद्योगिक अनुभव को एक साथ लाकर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे। इनमें स्मार्ट ग्रिड, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एनर्जी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, साइबर सुरक्षा, पावर सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल ग्रिड तकनीक, कार्बन कैप्चर और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
दोनों संस्थानों का लक्ष्य प्रयोगशालाओं में विकसित अत्याधुनिक शोध और नवाचारों को बड़े स्तर पर इस्तेमाल योग्य तथा व्यावसायिक रूप से व्यवहारिक तकनीकों में बदलना है। इससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
भारत के पावर सेक्टर के लिए विकसित होंगी भविष्य की तकनीकें
Tata Power के CEO एवं MD डॉ. प्रवीर सिन्हा ने कहा कि IIT Bombay के साथ साझेदारी के जरिए देश के बिजली क्षेत्र की अगली पीढ़ी के लिए नवाचार और तकनीक का बेहतर इस्तेमाल किया जाएगा। IIT Bombay के अत्याधुनिक शोध और Tata Power के बड़े स्तर पर समाधान लागू करने के अनुभव को जोड़कर भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा तकनीकों के विकास में तेजी लाने का प्रयास होगा।
उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत के लिए अधिक मजबूत, सुरक्षित, स्मार्ट और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था तैयार करने में योगदान देगी।
शोध को उद्योग तक पहुंचाने पर IIT Bombay का जोर
IIT Bombay के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे ने कहा कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन के लिए वैज्ञानिक शोध में प्रगति के साथ-साथ इन शोध परिणामों को भरोसेमंद, बड़े स्तर पर लागू होने वाली और उपयोगी तकनीकों में बदलना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि Tata Power के साथ यह सहयोग IIT Bombay के उस उद्देश्य के अनुरूप है, जिसके तहत उन्नत प्रयोगशाला शोध को वास्तविक औद्योगिक समाधानों में बदला जा सके। दोनों संस्थानों की शोध, नवाचार और बड़े पैमाने पर तकनीक लागू करने की क्षमताओं के मेल से स्वदेशी तकनीकों के विकास को गति देने का लक्ष्य है।
इस साझेदारी से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और भविष्य के लिए अधिक लचीला एवं आधुनिक पावर ग्रिड तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा
Tata Power और IIT Bombay का यह समझौता केंद्र सरकार के उस व्यापक प्रयास के अनुरूप है, जिसमें उद्योग और शिक्षण एवं शोध संस्थानों के बीच साझेदारी के जरिए महत्वपूर्ण तकनीकों के अनुसंधान, नवाचार और व्यावसायीकरण को तेज करने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों संस्थानों के सहयोग से प्रयोगशाला स्तर के नवाचारों को वास्तविक दुनिया में इस्तेमाल होने वाले ऊर्जा समाधानों में बदलने की दिशा में काम किया जाएगा।