आरा/रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले की कड़ियां बिहार के भोजपुर जिले तक पहुंचती जा रही हैं। सीआईडी ने भोजपुर के चरपोखरी थाना क्षेत्र के पसौर गांव निवासी मिथिलेश सिंह उर्फ आरके को दिल्ली से गिरफ्तार किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, मिथिलेश कथित तौर पर परीक्षा घोटाले में अभ्यर्थियों और गिरोह के बीच अहम कड़ी के रूप में काम कर रहा था। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
JPSC से कॉपी निकलवाने का दावा
जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक मिथिलेश सिंह की JPSC कार्यालय में अच्छी पहुंच थी। आरोप है कि वह आयोग से परीक्षा की कॉपियां निकलवाने के बाद अभ्यर्थियों से उन्हें लिखवाने की कथित व्यवस्था करता था। इसके बदले अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लिए जाने की बात सामने आई है।
सीआईडी की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर मिथिलेश का नाम इस मामले में सामने आया। इसके बाद जांच एजेंसी ने उसकी तलाश शुरू की और दिल्ली से उसे गिरफ्तार कर लिया।
बेटे के नाम पर परीक्षा कराने वाली कंपनी से जुड़ाव
मिथिलेश सिंह की गतिविधियों की जांच में उसकी कड़ी परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था आईसीएन इंडिया से भी जुड़ने की बात सामने आई है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में मिथिलेश सिंह का नाम शामिल नहीं है। इसके बावजूद जांच एजेंसी उसकी भूमिका और कंपनी से उसके कथित संपर्कों की पड़ताल कर रही है।
बताया जा रहा है कि मिथिलेश का नेटवर्क बिहार के अलावा राजस्थान, पंजाब और तेलंगाना तक फैला हुआ था। वह पहले भी चार बार जेल जा चुका है। जांच एजेंसी अब उसके पुराने मामलों और मौजूदा JPSC प्रकरण के बीच संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही है।
24 अभ्यर्थियों से कथित सेटिंग, 11 से 1.10 करोड़ रुपये लेने का आरोप
JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि गिरोह ने करीब 24 अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने की कथित डील की थी। इनमें से 11 अभ्यर्थियों से कुल करीब 1.10 करोड़ रुपये वसूले जाने का आरोप है।
मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को इस नेटवर्क से जुड़े कई और अहम तथ्यों के सामने आने की उम्मीद है। सीआईडी उसकी भूमिका, पैसों के लेन-देन और अभ्यर्थियों से कथित संपर्क की भी जांच कर रही है।
गांव में सामान्य छवि, गतिविधियों की भनक नहीं
मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद उसके गांव पसौर में भी चर्चा तेज हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, वह कभी-कभार ही गांव आता था और कुछ समय बाद वापस चला जाता था। गांव में उसकी कथित गतिविधियों के बारे में लोगों को कोई जानकारी नहीं थी।
गिरफ्तारी के बाद झारखंड पुलिस और सीआईडी की टीम मिथिलेश को लेकर उसके गांव भी पहुंची थी। जांच एजेंसी ने उसके स्थानीय संपर्कों और संभावित नेटवर्क से जुड़ी जानकारी जुटाने का प्रयास किया।
मिथिलेश सिंह से जुड़े प्रमुख आरोप:
- JPSC परीक्षा घोटाले में कथित अहम भूमिका
- अभ्यर्थियों से पास कराने के नाम पर कथित तौर पर लाखों रुपये की वसूली
- परीक्षा की कॉपियां आयोग से निकलवाने का आरोप
- 24 अभ्यर्थियों से कथित सेटिंग का मामला
- 11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ रुपये वसूली का आरोप
- बिहार समेत कई राज्यों में परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों से कथित जुड़ाव