चांडिल: झारखंड सरकार की लेटलतीफी का खामियाजा चांडिल अनुमंडल के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यहां दुर्घटनाएं भी अक्सर होती रहती हैं। लोग घायल होते हैं, मौतें भी होती हैं लेकिन सरकार मूकदर्शक है। फाइलें रेंग रही हैं।
आलम यह है कि सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया 50 बेड का नया अनुमंडल अस्पताल तीन माह पहले बनकर तैयार हो गया है। निर्माण करने वाली एजेंसी ने स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर भी कर दिया है। लोग यहां बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि उन्हें बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी।
डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों की नहीं हुई पदस्थापना
झारखंड सरकार की ओर से अब तक न तो चिकित्सकों की पदस्थाना की गई है और न ही स्वास्थ्य कर्मियों की। आखिर अस्पताल कैसे शुरू होगा।अनुमंडल के हर शख्स की जुबान पर है कि आखिर अस्पताल कब शुरू होगा। सीएचसी में मात्र तीन डॉक्टर हैं। उनके अलावा लगभग 14 स्वास्थ्यकर्मी हैं एनआरएचएम के तहत। ऐसे उनकी सेवा ले ली जाए तब भी अनुमंडल अस्पताल में इलाज की सुविधा शुरू नहीं हो सकेगी।
पुराने अस्पताल में सुविधाओं का अभाव
वर्तमान अनुमंडल अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए पेयजल तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन इनके संचालन का निर्धारित समय स्पष्ट नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई लैब भी लंबे समय से बंद पड़ी है।
अस्पताल की बिजली व्यवस्था के लिए लगाया गया सोलर सिस्टम भी लंबे समय से खराब बताया जा रहा है। परिसर में लगी हाईमास्ट लाइट की स्थिति भी खराब है। वहीं, अस्पताल परिसर में रखे पोलियो बॉक्स में बारिश का पानी जमा होने से संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
डॉक्टर और एंबुलेंस की भी कमी
अस्पताल की सबसे बड़ी समस्या चिकित्सकों और एंबुलेंस की कमी है। जानकारी के अनुसार अस्पताल को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए करीब 13 डॉक्टरों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में इससे काफी कम चिकित्सक उपलब्ध हैं। इसी तरह मरीजों की जरूरत के मुकाबले केवल एक एंबुलेंस के संचालित होने की बात सामने आई है।
चांडिल से होकर एनएच-32 और एनएच-33 गुजरते हैं। दोनों मार्गों पर आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में पर्याप्त चिकित्सक, एंबुलेंस और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की कमी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
गांगुडीह में कब बना नया अस्पताल?
क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गांगुडीह में नए अनुमंडल अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया। करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस भवन में 50 बेड की व्यवस्था की गई है। निर्माण के दौरान इसे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के अनुरूप विकसित किया गया है।
नए अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर, आधुनिक लैब, लेबर रूम, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड समेत मरीजों के उपचार से जुड़ी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आवास की व्यवस्था भी की गई है। भवन का निर्माण पूरा होने के बाद इसे स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित भी किया जा चुका है।
भवन तैयार, लेकिन उद्घाटन का इंतजार
नया अस्पताल भवन तैयार होने के बावजूद अभी तक इसका विधिवत उद्घाटन नहीं हो पाया है। इसके कारण आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ क्षेत्र की बड़ी आबादी को नहीं मिल पा रहा है।
सिविल सर्जन के अनुसार, अस्पताल भवन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित किया जा चुका है। उद्घाटन के लिए विभागीय स्तर पर पत्राचार किया गया है। उनका कहना है कि उद्घाटन होते ही अस्पताल का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
जनता को अब उद्घाटन की तारीख का इंतजार
चांडिल और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए यह अस्पताल बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मरीजों के मामलों में 50 बेड के आधुनिक अस्पताल के शुरू होने से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
ऐसे में सवाल यह है कि जब करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल भवन बनकर तैयार है, जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं और भवन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित किया जा चुका है, तो इसका संचालन आखिर कब शुरू होगा?
स्थानीय लोगों को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि नए अनुमंडल अस्पताल का जल्द उद्घाटन और नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन की उम्मीद है।