गुवा: गुवा सेल खदान में ड्यूटी के दौरान एग्जीक्यूटिव ऑफिसर दिवेंदु दास (32) की मौत के बाद मजदूरों का आक्रोश भड़क उठा है। शनिवार की रात पाली से मजदूरों ने खदान क्षेत्र में आने-जाने वाली सभी बसों को रोक दिया। इसके चलते खदान में लौह अयस्क का उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो गया। आंदोलन को गुवा की सभी प्रमुख यूनियनों का भी समर्थन मिला है।
मजदूरों और यूनियनों ने दिवंगत अधिकारी के आश्रित को तत्काल सेल में नौकरी देने और नियमानुसार पूरा मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की चेतावनी दी गई है।
ड्यूटी के दौरान सीने में उठा दर्द
जानकारी के अनुसार, 15 अगस्त को प्रथम पाली में ड्यूटी के दौरान दिवेंदु दास के सीने में अचानक तेज दर्द हुआ। सहकर्मी उन्हें तत्काल गुवा सेल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया है। घटना की सूचना मिलते ही सेल कर्मचारियों और मजदूरों में शोक के साथ आक्रोश फैल गया।
मजदूरों का कहना है कि कंपनी को दिवेंदु दास के आश्रितों को नियम के अनुसार मिलने वाला पूरा मुआवजा देना चाहिए। साथ ही उनकी पत्नी को सेल में नौकरी दी जानी चाहिए, ताकि परिवार को आर्थिक सहारा मिल सके।
पुलिस की निगरानी में चाईबासा भेजा गया शव
मांगों को लेकर मजदूरों ने काफी देर तक हंगामा किया। शनिवार रात करीब आठ बजे गुवा पुलिस की निगरानी में दिवेंदु दास के शव को पोस्टमार्टम के लिए चाईबासा भेजा गया।
बताया गया कि दिवेंदु दास की करीब दो वर्ष पहले आसनसोल से गुवा सेल खदान में नियुक्ति हुई थी। उनकी शादी को अभी महज एक वर्ष ही हुआ था। वह अपने वृद्ध माता-पिता के इकलौते वारिस बताए जा रहे हैं। उनकी पत्नी भी अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। ऐसे में उनकी अचानक हुई मौत से परिवार के साथ-साथ पूरे गुवा सेल क्षेत्र में शोक का माहौल है।

प्रबंधन ने बताई अलग परिस्थिति
सेल के मुख्य महाप्रबंधक चंद्रभूषण कुमार ने बताया कि दिवेंदु दास की मौत घर जाने के दौरान रास्ते में हार्ट अटैक आने से हुई। वहीं, मजदूरों का आंदोलन रविवार को भी जारी है। बसों के रोके जाने के कारण गुवा सेल खदान में लौह अयस्क का उत्पादन पूरी तरह प्रभावित बताया जा रहा है।