July 27, 2026
टाउन पोस्ट
सच्ची खबर, सही समय पर
झारखंड

भारत-नेपाल के व्यापारिक रिश्ते खुली सीमा और साझा संस्कृति से मजबूत होंगे : नेपाली सांसद

भारत-नेपाल के व्यापारिक रिश्ते खुली सीमा और साझा संस्कृति से मजबूत होंगे : नेपाली सांसद

मुंबई, 27 जुलाई (आईएएनएस)। नेपाली सांसद संदीप राणा ने कहा क‍ि भारत और नेपाल के बीच व्यापार का बहुत बड़ा स्कोप है। साझा संस्कृति, खुली सीमा और प्राकृतिक संसाधन व्यापार को नई दिशा दे सकते हैं।

सोमवार को मुंबई में आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल भारत का एक बड़ा ट्रेड पार्टनर है। नेपाल बहुत सारी चीजें भारत से खरीदता है। एक अनुमान के मुताबिक, नेपाल भारत से बहुत अधिक सामानों की खरीदारी करता है। ये सामान हर क्षेत्र से संबंधित हैं। वहीं, नेपाल से कम ही चीजें यहां आती हैं, जैसे चाय, कुछ स्टील्स, कुछ ऑयल्स और ऐसी ही कुछ चीजें। लेकिन इसको और बढ़ाया जा सकता है।

उन्‍होंने कहा क‍ि अभी इसलिए बढ़ा सकते हैं क्‍योंकि‍ हमारा खान-पान एक जैसा है। इसीलिए हमारे उत्पाद यहां भारत में बेचना आसान है। नेपाल की तुलना में भारत एक बहुत बड़ी जनसंख्या वाला देश है। यहां 140 करोड़ जनसंख्या है और हमारे यहां तीन करोड़ जनसंख्या है।

उन्‍होंने कहा क‍ि लेकिन हमारे यहां ऐसी चीजों का उत्पादन होता है, जो एकदम हिमालय की गोद में हैं। एकदम फ्रेश, एकदम ऑर्गेनिक, और ये बहुत ही स्वच्छ पानी से सिंचित होकर उगी हुई होती हैं। इसके साथ-साथ कई सारी चीजें हैं, जो दोनों देशों के विकास के लिए अच्छी हैं। ऐसा ट्रेड हम लोग कर सकते हैं।

सांसद राणा ने बताया क‍ि अभी भी कई सारी चीजें, दैनिक उपभोग की चीजें, दोनों देशों में एक-दूसरे के यहां से आती हैं। सबसे बड़ी बात है क‍ि दोनों का ओपन बॉर्डर है। कहीं भी हमारे या भारत के नागर‍िक आ जा सकते हैं। एकदम आसानी से आ-जा सकते हैं। ऐसी सुव‍िधाओं के चलते दोनों देशों के बीच ट्रेड का बहुत बड़ा स्कोप है।

उन्‍होंने नेपाल के हालात पर चर्चा करते हुए बताया क‍ि हमारे यहां सरकार बहुत अच्‍छे से काम कर रही है। हम लोग बहुत उत्‍साह‍ित हैं। नेपाल और भारत दोनों देशों की म‍ित्रता होने के कारण दोनों देश की सरकारें नागर‍िकों के ह‍ित को ध्‍यान में रखते हुए म‍िलकर काम कर रही हैं।

–आईएएनएस

एवाई/एबीएम

Feel like reacting? Express your views here!

Discover more from Town Post

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading