August 6, 2026
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जमशेदपुर

मानगो भिलाईपहाड़ी के कलाकार सूरज चालक ने कल्पना सोरेन को भेंट की दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर

मानगो भिलाईपहाड़ी के कलाकार सूरज चालक ने कल्पना सोरेन को भेंट की दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर

कला के माध्यम से झारखंड की मिट्टी, संघर्ष और संवेदना को नई पहचान देने वाला एक प्रेरक क्षण

गालूडीह : घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को लेकर आयोजित जनसभा के दौरान गालूडीह में आयोजित झामुमो की चुनावी जनसभा में कलाकार सूरज ने कल्पना सोरेन को भेंट की दिशोम गुरु की तस्वीर।

सभा के दौरान मंच पर झामुमो की स्टार प्रचारक एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन उपस्थित थीं। मंच पर राजनीति और कला का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब जुगसलाई विधानसभा अंतर्गत भिलाईपहाड़ी गाँव के एक होनहार और दलित परिवार से आने वाले युवा कलाकार सूरज चालक ने अपने हाथों से बनाए गए दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर को सप्रेम भेंट किया।

सूरज चालक ने बताया कि उन्होंने यह चित्र दिशोम गुरु के निधन के बाद उनकी स्मृति में बनाया था, लेकिन उसे व्यक्तिगत रूप से सौंपने का अवसर अब जाकर मिला। उन्होंने कहा — “मैंने यह चित्र केवल गुरुजी की याद में नहीं, बल्कि झारखंड की उस आत्मा को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाया है, जिसने हमें अपनी पहचान और अधिकारों की लड़ाई सिखाई।”

इस अवसर पर सूरज चालक ने पोटका विधानसभा के विधायक संजीव सरदार एवं सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता दीपक रंजीत का हार्दिक धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा “मैं हृदय से पोटका विधायक संजीव सरदार जी का आभारी हूँ, जिनके सहयोग, मार्गदर्शन और प्रेरणा से मुझे यह अवसर मिला कि मैं अपनी कला को कल्पना सोरेन जी तक पहुँचा सकूँ।”

कल्पना सोरेन ने उस क्षण को आत्मीयता से स्वीकार करते हुए कहा —आपकी इस कला का हम सम्मान करते हैं। यह केवल एक चित्र नहीं, बल्कि दिशोम गुरु की आत्मा का आशीर्वाद है। इसे हम अपने घर में स्नेहपूर्वक लगाएंगे।”

मौके पर उपस्थित लोगों ने युवा कलाकार की प्रशंसा करते हुए तालियों से उनका हौसला बढ़ाया। सूरज चालक की कला में झारखंड की मिट्टी की गंध, मेहनतकश समाज की झलक और लोकजीवन की गहराई साफ दिखाई देती है। सीमित साधनों के बावजूद उनका समर्पण झारखंड के युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा है।

यह मुलाकात सिर्फ एक सम्मान का पल नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी — कि कला किसी जाति, वर्ग या परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। यह झारखंड की आत्मा और अस्मिता की जीवंत अभिव्यक्ति है।

गालुडीह की इस घटना ने राजनीति, कला और संवेदना को एक सूत्र में पिरो दिया — जो झारखंड की असली पहचान है। मिट्टी, मेहनत और मानवीयता का संगम।

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