September 11, 2026
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सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने की ड्रोन व ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने की ड्रोन व ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा

नई दिल्ली । थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी लगातार सैन्य तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। बीते दिनों कई सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर चुके सेना प्रमुख ने अब ड्रोन तैयारियों, प्रशिक्षण में नवाचार समेत विभिन्न विषयों का निरीक्षण किया। दरअसल थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने खड़गा कोर का दौरा किया है। यहां उन्होंने ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्हें युद्धक क्षमता को सुदृढ़ करने, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के एकीकरण, अंतर-एजेंसी समन्वय को बढ़ाने तथा राष्ट्र निर्माण से जुड़ी पहलों के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया। गौरतलब है आधुनिक युद्धों के तौर तरीके व तकनीक लगातार बदल रही है। अब पारंपरिक युद्धों की भांति जंग केवल बंदूक व तोपों तक सीमित नहीं रह गई है। आज के युद्धों में ड्रोन व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। इसके अलावा रोबोट और डेटा वॉरफेयर ने भी इन्फैंट्री को नई दिशा दी है। इसकी एक मजबूत तस्वीर खड़गा कोर में देखने को मिलती है। यहां ड्रोन जैसी तकनीक को व्यापक स्तर पर उपयोग में लाया जा चुका है।
सेनाध्यक्ष ने जहां यहां ड्रोन तैयारियों की जानकारी ली वहीं उन्होंने कोर द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रदर्शित उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना भी की। उन्होंने ड्रोन डिजाइन एवं प्रशिक्षण में नवाचार, लॉजिस्टिक्स और प्रशासन में उन्नत तकनीकी समाधान अपनाने, पूर्व सैनिकों व परिवारों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा ऑपरेशन राहत के अंतर्गत मानवीय सहायता गतिविधियों की प्रशंसा की।
थलसेना प्रमुख ने यह भी रेखांकित किया कि खड़गा कोर द्वारा मिलिटरी-सिविल फ्यूजन को प्रोत्साहन देकर सस्टेनेबल सिक्योरिटी की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया जा रहा है। यहां मौजूद सभी अधिकारियों और जवानों के साथ बातचीत के दौरान, जनरल द्विवेदी ने उनकी पेशेवर दक्षता, निष्ठा और राष्ट्र सेवा के प्रति अटूट समर्पण की प्रशंसा की। भारतीय सेना की शक्ति उसके कर्मयोगियों की प्रतिबद्धता, साहस और अनुशासन में निहित है, और यही भावना सेना को हर चुनौती का सामना करने में सक्षम बनाती है।
सेनाध्यक्ष का यह दौरा न केवल कोर की तैयारियों का मूल्यांकन था, बल्कि यह सैनिकों के उत्साहवर्धन और भारतीय थलसेना की सतत आधुनिकीकरण प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। गौरतलब है कि पिछले दिनों भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बीकानेर मिलिट्री स्टेशन और यहां के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा भी किया था। सेनाध्यक्ष ने वहां भारतीय सेना की ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने यहां सैनिकों और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर उनसे बात की।
थलसेना अध्यक्ष ने इस दौरान सेना के आधुनिकीकरण, युद्धक तैयारियों, तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ करने और परिचालन उत्कृष्टता पर बल दिया। बीकानेर के सैनिकों और पूर्व सैन्य दिग्गजों को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कठोर मरुस्थलीय एवं अर्ध-मरुस्थलीय इलाके में ड्यूटी निभाने के लिए उनकी प्रतिबद्धता, समर्पण और मल्टी-एजेंसी समन्वय की सराहना की थी।
उन्होंने कहा कि उच्च ऑपरेशनल रेडीनेस बनाए रखने के लिए तकनीक का सभी स्तरों पर आत्मसात करना अनिवार्य है। सेना प्रमुख ने कहा था कि मौजूदा जटिल सुरक्षा माहौल में सशस्त्र बलों, सरकारी एजेंसियों, उद्योग, शिक्षाविदों और समाज के बीच निर्बाध समन्वय आवश्यक है। उन्होंने मिलिट्री-सिविल फ्यूजन के महत्व को रेखांकित किया और पूर्व सैनिकों के योगदान की सराहना की। ये वे सैनिक हैं जिन्होंने भारत की रक्षा तैयारी और युद्धक प्रभुत्व को मजबूत किया है।

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