August 11, 2026
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जमशेदपुर

टाटा समूह के प्रमुख ने ममता से की मुलाकात

टाटा समूह के प्रमुख ने ममता से की मुलाकात
during a meeting n chandrasekharan and mamta banerjee.

जमशेदपुर, कोलकाता : टाटा समूह के प्रमुख एन चंद्रशेखरन ने बुधवार को राज्य सचिवालय नवान्न में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या टाटा समूह राज्य में नए निवेश की राह पर आगे बढ़ेगा?

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से इस मुलाकात की तस्वीरें शाम में साझा की, जिसमें टाटा समूह के प्रमुख को उत्तरीय पहनाकर मुख्यमंत्री अभिनंदन करतीं दिख रही हैं। तृणमूल ने एक्स पर लिखा- बंगाल सरकार राज्य को औद्योगिक क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बंगाल के औद्योगिक विकास और उभरते अवसरों पर रचनात्मक संवाद के लिए टाटा संस और टाटा समूह के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन की मेजबानी की। इस बैठक में नवाचार, निवेश और समावेशी विकास को बढ़ावा देने वाली सार्थक सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए बंगाल की प्रतिबद्धता परिलक्षित हुई। पार्टी ने उम्मीद है कि यह चर्चा भविष्य के औद्योगिक निवेश में अहम भूमिका निभाएगी। चंद्रशेखरन की मुख्यमंत्री के साथ बैठक के दौरान राज्य के मुख्य सचिव मनोज पंत भी मौजूद थे। हालांकि फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि मुख्यमंत्री ने बैठक में टाटा समूह के प्रमुख के साथ क्या चर्चा की। न तो ममता और न ही चंद्रशेखरन ने इस बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ कहा है। मालूम हो कि इस साल की शुरुआत में हुए वार्षिक बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट (बीजीबीएस) के दौरान, मुख्यमंत्री ने टाटा समूह के प्रमुख के साथ फोन पर बातचीत की थी। ममता ने खुद यह बात कही थी। बीजीबीएस में रिलायंस, जिंदल, आरपीएसजी समेत देश के शीर्ष उद्योगपतियों ने भाग लिया था। लेकिन उद्घाटन समारोह में टाटा समूह के शीर्ष से कोई भी वहां नहीं था। बाद में, मुख्यमंत्री ने कहा था कि मैंने टाटा समूह के प्रमुख से फ़ोन पर बात की है। वह किसी व्यस्त कार्यक्रम के कारण से बीजीबीएस में नहीं आ पा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने सीईओ स्तर के अधिकारियों को भेजा है। ममता ने कहा था कि टाटा बंगाल के लिए बहुत कुछ करना चाहता है। उस समय, ममता ने यह भी कहा था कि टाटा समूह के प्रमुख ने उनसे कहा है कि अगर उन्हें मौका मिला तो वह बाद में कोलकाता आकर उनसे मिलेंगे। इसके करीब चार महीने बाद आखिरकार दोनों की मुलाकात बुधवार को हुई।

बताते चलें कि ममता जब विपक्ष की नेता थीं, तब उन्होंने टाटा समूह की लखटकिया नैनो कार परियोजना के खिलाफ सिंगूर में बहुचर्चित भूमि आंदोलन का नेतृत्व किया था।

ममता ने तत्कालीन बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाममोर्चा सरकार पर सिंगूर में नैनो संयंत्र के लिए किसानों से जबरन भूमि अधिग्रहण का आरोप लगाते हुए आंदोलन किया था। उस आंदोलन के दौरान टाटा को सिंगूर से अपनी परियोजना को गुजरात में हस्तांतरित करना पड़ा था। सिंगूर आंदोलन के फलस्वरूप ममता ने लगातार 34 वर्षों से राज्य की सत्ता पर काबिज वाममोर्चा सरकार को 2011 के चुनाव के बाद सत्ता से हटाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थीं।

हालांकि मुख्यमंत्री बनने से पहले और बाद में ममता ने कई बार कहा है कि वह कभी भी टाटा के खिलाफ नहीं थीं। वह तत्कालीन बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा जबरन भूमि अधिग्रहण के तरीके के खिलाफ थीं। लेकिन अब ये सब अतीत की बात हो चुकी है।

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