गिरिडीह : गिरिडीह के तिसरी प्रखंड की गुमगी पंचायत स्थित आदिवासी बहुल बढ़नियाटांड़ गांव में आज भी सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं। इसका खामियाजा ग्रामीणों को आपात स्थिति में भुगतना पड़ता है।
हाल ही में एक महिला की तबीयत बिगड़ने पर एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद परिजन और ग्रामीण उसे खाट पर लिटाकर करीब एक किलोमीटर तक कंधे के सहारे मुख्य सड़क तक ले गए। इस घटना की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद गांव की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है।
सड़क और पुल नहीं होने से बढ़ी परेशानी
बढ़नियाटांड़ गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए नरैना नदी पर पुल की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। गांव में पक्की सड़क नहीं होने के कारण सामान्य दिनों में भी आवागमन मुश्किल रहता है। वहीं, बारिश के दौरान नरैना नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी बीमार और बुजुर्ग लोगों को होती है। आपात स्थिति में एंबुलेंस या अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में मरीजों को खाट पर लिटाकर ग्रामीणों के कंधों के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।
वर्षों से पुल और सड़क की मांग
ग्रामीणों के अनुसार, नरैना नदी पर पुल और गांव तक पक्की सड़क बनाने की मांग वर्षों पुरानी है। ग्रामीण कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रख चुके हैं, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल उनके लिए महज सुविधा का साधन नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य और आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने के लिए बेहद जरूरी हैं।
नेता प्रतिपक्ष के गृह प्रखंड में विकास पर सवाल
बढ़नियाटांड़ की स्थिति इसलिए भी सवाल खड़े करती है क्योंकि तिसरी प्रखंड को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और धनवार विधायक बाबूलाल मरांडी का गृह क्षेत्र माना जाता है। इसके बावजूद आदिवासी बहुल गांव में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव विकास के दावों पर सवाल खड़ा करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास और सुविधाओं के वादे किए जाते हैं, लेकिन जरूरत के समय गांव तक एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती। ऐसे में ग्रामीणों के सामने यह सवाल है कि उनकी इस गंभीर समस्या का समाधान आखिर कब होगा।
केंद्रीय मंत्री के संसदीय क्षेत्र में भी बुनियादी सुविधा का अभाव
तिसरी प्रखंड कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ऐसे में एक गांव में मरीज को खाट पर ढोकर मुख्य सड़क तक ले जाने की तस्वीर इलाके में विकास की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बढ़नियाटांड़ की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने की मांग की है। उनकी मांग है कि नरैना नदी पर जल्द पुल का निर्माण कराया जाए और गांव को पक्की सड़क से जोड़ा जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सड़क और पुल की सुविधा नहीं मिलती, तब तक किसी भी आपात स्थिति में उनकी जिंदगी जोखिम में बनी रहेगी। अब देखना यह है कि खाट पर मरीज को ढोने की यह तस्वीर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान खींचती है या फिर बढ़नियाटांड़ के ग्रामीण आगे भी आश्वासनों के भरोसे विकास का इंतजार करते रहेंगे।