जमशेदपुर : जमशेदपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जमशेदपुर महानगर इकाई ने आपातकाल के 51 वर्ष पूरे होने पर शनिवार को संविधान हत्या दिवस मनाया।
बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया और युवा पीढ़ी से इतिहास से सीख लेने का आह्वान किया।
भाजपा ने लोकतंत्र सेनानियों को किया सम्मानित
भाजपा जमशेदपुर महानगर की ओर से बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन के मानस सभागार में महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित संगोष्ठी में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।
कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। वहीं, सांसद विद्युत वरण महतो, प्रदेश उपाध्यक्ष आभा महतो, प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह, पूर्व विधायक मेनका सरदार, जिला प्रभारी बबन गुप्ता तथा पूर्व जिलाध्यक्ष ब्रह्मदेव नारायण शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान आपातकाल में जेल की यातनाएं झेलने वाले लोकतंत्र सेनानी ब्रह्मदेव नारायण शर्मा, दिनेश मंडल, ललन सिंह और दयाशंकर पांडेय को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।
इससे पहले लोकनायक जयप्रकाश नारायण के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलन के साथ संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। नेताओं ने आपातकाल पर आधारित प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।
युवा पीढ़ी को इतिहास जानना जरूरी : संजीव सिन्हा
स्वागत भाषण में भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा ने कहा कि नई पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास और उस दौर की घटनाओं की सही जानकारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इतिहास से सीख लेकर ही भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है। इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष ब्रह्मदेव नारायण शर्मा ने आपातकाल के दौरान जेल में बिताए अपने अनुभव भी साझा किए।
‘1975 का आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था’ : डॉ. प्रदीप वर्मा
मुख्य वक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 की मध्यरात्रि में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे कलंकित अध्याय था। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को दरकिनार कर देश पर आपातकाल थोप दिया।
उन्होंने कहा कि 21 महीनों तक नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित रहे, प्रेस पर सेंसरशिप लागू रही और मीसा व डीआईआर जैसे कानूनों के तहत एक लाख से अधिक लोगों को जेलों में बंद किया गया।
डॉ. वर्मा ने आरोप लगाया कि उस समय विपक्ष के नेताओं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि संजय गांधी के प्रभाव में चलाए गए जबरन नसबंदी अभियान के कारण हजारों लोगों को नुकसान उठाना पड़ा। डॉ. वर्मा ने कहा कि जो दल आज संविधान और लोकतंत्र के खतरे की बात करते हैं, उन्हें आपातकाल के दौर को याद करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का भी दावा किया।
कांग्रेस पर साधा निशाना
जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने कहा कि आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर युवाओं को यह बताया जाना चाहिए कि किस प्रकार उस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों को कमजोर किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने अपनी सत्ता बचाने के लिए विपक्षी नेताओं को जेल भेजा और प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगाई।
प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह ने कहा कि देश ने मुगल और अंग्रेजी शासन के दौरान भी अत्याचार देखे, लेकिन स्वतंत्र भारत में आपातकाल के दौरान जनता को जिस तरह की प्रताड़ना झेलनी पड़ी, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा संकट था। उन्होंने कहा कि यह दौर भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में हमेशा एक चेतावनी के रूप में याद रखा जाएगा।
