September 10, 2026
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सिरमौर में यमुना घाट की बदहाल स्थिति पर श्रद्धालुओं ने जताई चिंता, नमामि गंगे परियोजना की रफ्तार पर उठाए सवाल

सिरमौर में यमुना घाट की बदहाल स्थिति पर श्रद्धालुओं ने जताई चिंता, नमामि गंगे परियोजना की रफ्तार पर उठाए सवाल

सिरमौर, 14 जून (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की धार्मिक नगरी पांवटा साहिब में स्थित यमुना घाट पर साफ-सफाई की स्थिति और नदी में कम जलस्तर को लेकर श्रद्धालुओं ने चिंता व्यक्त की है। साथ ही, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे’ परियोजना के तहत चल रहे कार्यों की गति और प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए गए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यमुना घाट का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व होने के बावजूद यहां श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

दिल्ली से अपने जत्थे के साथ पांवटा साहिब पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया कि वे श्री पांवटा साहिब के दर्शन के लिए आए हैं। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें ठहरने के लिए अच्छे कमरे मिले हैं और पूरी व्यवस्था सुव्यवस्थित है। उन्होंने पहले से बुकिंग करवाई थी और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि, यमुना नदी के तट पर पहुंचने के बाद उनको निराशा हाथ लगी। श्रद्धालु ने कहा कि यमुना नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि सिख इतिहास और आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। उन्होंने कहा कि वे नदी के किनारे की स्थिति देखने पहुंचे थे, लेकिन वहां चल रहे कार्यों की रफ्तार और व्यवस्था को देखकर उन्हें लगा कि काम अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है।

उन्होंने कहा कि नदी के किनारे सफाई और सौंदर्यीकरण का कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। उनके अनुसार, इतनी बड़ी नदी के संरक्षण और विकास के लिए केवल एक मशीन के सहारे काम करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में इस कार्य को प्राथमिकता देती तो यहां अधिक संसाधन और मशीनरी तैनात की जाती, ताकि काम तेजी से पूरा हो सके।

श्रद्धालु ने यह भी कहा कि यमुना घाट पर स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं होनी चाहिए। उन्होंने दिल्ली के विभिन्न गुरुद्वारों और सरोवरों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां श्रद्धालुओं के स्नान के लिए व्यवस्थित और सुरक्षित इंतजाम किए गए हैं। इसी प्रकार की सुविधाएं पांवटा साहिब के यमुना घाट पर भी विकसित की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालु यहां आकर धार्मिक स्नान कर सकें और अपने ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक जुड़ाव को महसूस कर सकें।

उन्होंने कहा कि उनके लिए यमुना केवल एक नदी नहीं है, बल्कि इतिहास और श्रद्धा का प्रतीक है। गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन और पांवटा साहिब के इतिहास से जुड़े इस स्थान का विशेष महत्व है। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालु चाहते हैं कि घाट का विकास इस तरह किया जाए कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिले और लोगों को बेहतर अनुभव प्राप्त हो।

श्रद्धालु ने बताया कि वे अपने साथियों के साथ यहां आने से पहले यह सोचकर आए थे कि गुरुद्वारा साहिब के दर्शन के साथ-साथ यमुना घाट पर भी समय बिताएंगे और संभव हो तो स्नान भी करेंगे, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा करना संभव नहीं लग रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे केवल गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेककर वापस लौट जाएंगे, क्योंकि घाट पर वह सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं जिनकी उन्हें अपेक्षा थी।

श्रद्धालुओं ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि नमामि गंगे परियोजना के तहत चल रहे कार्यों में तेजी लाई जाए और यमुना घाट को एक स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधायुक्त धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया जाए। उनका कहना है कि पांवटा साहिब देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए यहां बुनियादी सुविधाओं और घाटों के विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

डीकेपी

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