July 30, 2026
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झारखंड

सरायकेला सिविल न्यायालय भवन के स्थानांतरण प्रस्ताव का विरोध, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस व मुख्यमंत्री से पुनर्विचार करने का आग्रह करेगा अधिवक्ता संघ

सरायकेला सिविल न्यायालय भवन के स्थानांतरण प्रस्ताव का विरोध, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस व मुख्यमंत्री से पुनर्विचार करने का आग्रह करेगा अधिवक्ता संघ

सरायकेला : जिला अधिवक्ता संघ, सरायकेला ने सिविल न्यायालय भवन के स्थानांतरण के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया है। साथ ही इस मामले को लेकर अधिवक्ता संघ का एक प्रतिनिधिमंडल झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री और झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मुलाकात कर सही स्थिति की जानकारी देगा। संघ के सदस्यों का कहना है कि पहले जलजमाव की समस्या थी, वह भी बारिश के मौसम में लेकिन अब इस समस्या से निजात मिल गई है।

इस मामले को लेकर रविवार को जिला अधिवक्ता संघ, सरायकेला में एक आपात जनरल बॉडी की बैठक अध्यक्ष प्रभात कुमार की अध्यक्षता में हुई। बैठक में संघ के सह सचिव जलेश कवि के द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई लिखित सूचना पर मिली जानकारी को बैठक में प्रस्तुत किया गया। जानकारी मिली कि सिविल न्यायालय भवन को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है।

वरिष्ठ अधिवक्ता गोलक बिहारी पति, के. पी .दुबे ,आशीष पात्र, एच. सी. हजरा, उपाध्यक्ष केदारनाथ अग्रवाल, सह सचिव जलेश कवि ,अधिवक्ता ओम प्रकाश ,अधिवक्ता अरुण सिंह के अलावा संघ के अन्य अधिवक्ताओं ने एक स्वर से स्थानांतरण संबंधी प्रस्ताव पर विरोध जताते हुए कहा कि अधिवक्ता संघ को बिना किसी तरह का जानकारी या सूचना देकर जो प्रस्ताव ली गई है, वह उचित नहीं है।

संघ के सभी अधिवक्ताओं के कहा कि इस विषय को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री एवं माननीय चीफ जस्टिस झारखंड हाई कोर्ट रांची को एक आवेदन देने का विचार किया गया। बहुत जल्द अधिवक्ता संघ के एक प्रतिनिधिमंडल संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर सही विषय वस्तु को रखते हुए स्थानांतरण संबंधी प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और वर्तमान न्यायालय परिसर में ही रखने का अनुरोध किया जाएगा, क्योंकि प्राप्त सूचना के आधार पर यह पता चला है कि केवल बरसात में इस न्यायालय भवन के पीछे जल जमाव होने का कारण देते हुए इसको स्थानांतरित करने का प्रस्ताव किया गया है।

सूचना से प्राप्त जानकारी के मुताबिक पिछले 2 साल में जल जमाव की समस्या को दूर करने के लिए नगर पंचायत सरायकेला एवं संबंधित विभाग द्वारा करीब चार-पांच करोड़ रुपये खर्च की गई। इसके बाद पिछले दो साल से जल जमाव की समस्या वर्षा ऋतु या अन्य किसी भी मौसम में देखने को नहीं मिलता है।

ज्ञात हो कि सिविल न्यायालय भवन के आगे पीछे , बहुत बड़ा सा सरकारी भूखंड खाली पड़ा हुआ है, जिसमें जरूरत के हिसाब से या फिर नए सिरे से भी भवन का निर्माण कराया जा सकता है । इसके अलावा यह स्थान क्षेत्र के केंद्र में एवं समुचित जगह के साथ-साथ हर दृष्टि से सुरक्षित भी है। साथ ही इस क्षेत्र का आम जनता के लिए एकमात्र आय के स्रोत का साधन है।

बैठक में लिए गए निर्णय के हर बिंदुओं को लेकर बहुत जल्द जिला अधिवक्ता संघ का एक प्रतिनिधिमंडल संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर स्थल की सही स्थिति से अवगत करने हेतु मुलाकात करेंगे।

आज के बैठक में अधिवक्ता जीवानंद पांडा, अनिल सारंगी, लखींद्र नायक,राधेश्याम शाह, निर्मला आचार्य, सुनील सिंह दो, सुशील पदार,आशीष सारंगी, सूरज पूर्ति , राजेश सहाय, सुवास सामंत, नैना पहाड़ी, राजकुमार साहू, कार्यकारणी सदस्य, प्रदीप तेंदू रथ, रजत पटनायक, दुर्गा चरण जंको,लोकनाथ केसरी, सुखमति हिस्सा, सरोज महाराणा आदि सभी अधिवक्ता संघ के सदस्य उपस्थित थे।

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