गम्हरिया : झारखंड में कमीशन नहीं मिलने के कारण सरायकेला खरसावां जिले के जन वितरण प्रणाली के डीलरों की स्थिति दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है।
झारखंड पीडीएस संघ ने राज्य सरकार से करीब एक वर्ष से लंबित कमीशन का तत्काल भुगतान करने की मांग करते हुए कहा है कि डीलर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं और दुकान संचालन के साथ परिवार का खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है।
झारखंड पीडीएस संघ के प्रदेश सचिव सह कोल्हान संयोजक एवं सरायकेला-खरसावां जिला अध्यक्ष फूलकांत झा ने राज्य सरकार के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग का ध्यान राशन डीलरों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया है।
उन्होंने कहा कि राज्यभर के कई जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) डीलरों का कमीशन पिछले लगभग एक वर्ष से लंबित है, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
फूलकांत झा ने कहा कि लंबे समय से कमीशन नहीं मिलने के कारण राशन डीलरों के लिए परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई का खर्च और जनवितरण दुकान का नियमित संचालन करना लगातार कठिन होता जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग की ओर से ई-केवाईसी (e-KYC) शत-प्रतिशत पूरा कराने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन लंबित कमीशन के भुगतान को लेकर न तो कोई स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है और न ही कोई ठोस आश्वासन दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद राशन डीलर पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ लाभुकों तक समय पर खाद्यान्न पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। डीलर लगातार मेहनत कर सरकारी योजनाओं को धरातल तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन उन्हें उनके मेहनताने का समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है।
झा ने विभागीय कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों का पूरा ध्यान निरीक्षण, शिकायतों की समीक्षा और कार्रवाई तक सीमित होकर रह गया है, जबकि डीलरों की वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं की जा रही है।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि यदि झारखंड सरकार जनवितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुदृढ़ और प्रभावी बनाना चाहती है तो राशन डीलरों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना होगा।
साथ ही, लंबित कमीशन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि डीलर बिना आर्थिक दबाव के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।
फूलकांत झा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में राशन डीलरों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। जो डीलर दिन-रात मेहनत कर आम लोगों तक खाद्यान्न पहुंचा रहे हैं, वही आज अपने मेहनताने और अधिकार के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।