रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) नियुक्ति घोटाला मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को बड़ा झटका लगा है। सीआईडी कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। जमानत को लेकर हुई सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में रखने का फैसला बरकरार रखा है।
मामले में 3 सितंबर को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष को राहत देने से इनकार कर दिया।
बचाव पक्ष ने कहा- ठोस सबूत नहीं
सुनवाई के दौरान एल खियांग्ते की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिसके आधार पर उन्हें मामले में आरोपी बनाए रखा जाए। बचाव पक्ष का कहना था कि जांच एजेंसी की ओर से की गई छापेमारी के दौरान भी कोई ऐसा आपत्तिजनक दस्तावेज या महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद नहीं हुआ, जो उनकी संलिप्तता साबित करता हो।
अधिवक्ता ने इसी आधार पर अदालत से एल खियांग्ते को जमानत देने की मांग की थी।
CID ने लगाए गंभीर आरोप
वहीं, जांच एजेंसी सीआईडी ने मामले में पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। सीआईडी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, एक ब्लैकलिस्टेड निजी कंपनी टीडीपीएल को परीक्षा आयोजित करने का काम दिलाने में एल खियांग्ते की कथित भूमिका रही।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के बदले भारी कमीशन लिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इसके अलावा सीआईडी ने पूछताछ के दौरान साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया है।
इन्हीं आरोपों और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सीआईडी ने एल खियांग्ते को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में जेल में हैं। फिलहाल अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्हें जेल में ही रहना होगा।