जमशेदपुर। चीनी और प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने केंद्र और झारखंड सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
रविवार को जमशेदपुर के बाजार में प्याज की कीमत करीब 55 रुपये प्रति किलो पहुंचने के बीच उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को ट्वीट कर बाजार में कार्टेल, जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर रोक लगाने की मांग की।
सरयू राय ने कहा कि चीनी की मिल स्तर पर बढ़ती कीमतों का असर आने वाले दिनों में झारखंड के थोक और खुदरा बाजार पर पड़ सकता है। झारखंड में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों से होता है, इसलिए दूसरे राज्यों में कीमत बढ़ने का सीधा असर यहां के उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
उन्होंने सरकार से कीमतों में तेजी का इंतजार करने के बजाय अभी से स्टॉक और आपूर्ति की निगरानी शुरू करने को कहा।
मिल रेट में चीनी की कीमत में तेजी
22 अगस्त के उपलब्ध मिल रेट का हवाला देते हुए सरयू राय ने चीनी की कीमतों में हो रही वृद्धि पर सवाल उठाया। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों में चीनी का भाव 5,820 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक है।
उत्तर प्रदेश स्टेट शुगर कॉरपोरेशन की मोहीउद्दीनपुर मिल में यह दर 6,000 रुपये, जबकि पिपराइच और मुंडेरवा में 6,200 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है।
महाराष्ट्र में भी चीनी की कीमतें इससे अधिक हैं। छत्रपति संभाजी राजे सहकारी चीनी उद्योग लिमिटेड ने एम-30 चीनी का रेट 6,800 रुपये, एसएस-30 का 6,700 रुपये और एस-30 का 6,675 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इन दरों में जीएसटी अतिरिक्त है।
यानी मिल स्तर पर चीनी की कीमत करीब 66.75 से 68 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है।
नई गन्ने की फसल से पहले बढ़ी कीमत पर सवाल
सरयू राय ने कहा कि करीब एक से डेढ़ महीने में गन्ने की नई फसल आने वाली है। ऐसे में चीनी की कीमत में अचानक तेजी का कोई स्पष्ट औचित्य नजर नहीं आता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नई फसल आने में ज्यादा समय नहीं बचा है, तो कीमत बढ़ाकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जा रहा है।
उन्होंने सरकार से पुराने रेट पर चीनी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की मांग की। साथ ही मिलों, थोक कारोबारियों और बड़े स्टॉकिस्टों के पास उपलब्ध चीनी के स्टॉक की जांच कराने की बात कही। उनका कहना है कि यदि किसी कारोबारी के पास निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक पाया जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
प्याज की कीमत और जमाखोरी पर भी नजर रखने की मांग
सरयू राय ने प्याज की बढ़ती कीमतों को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज के भाव बढ़ रहे हैं और ऐसे में जमाखोरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने नाफेड की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकारी हस्तक्षेप का असर बाजार में दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने झारखंड सरकार से जमशेदपुर, रांची और धनबाद समेत राज्य के प्रमुख बाजारों में चीनी और प्याज के स्टॉक तथा थोक कीमतों की नियमित निगरानी करने का आग्रह किया।
अचानक कीमत बढ़ने की स्थिति में प्रशासन को केवल खुदरा बाजार तक सीमित रहने के बजाय माल के स्रोत और स्टॉक की पूरी श्रृंखला की जांच करनी चाहिए।
महंगाई का असर छोटे कारोबार पर भी
सरयू राय ने कहा कि चीनी और प्याज जैसी आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ घरेलू बजट पर नहीं पड़ता। होटल-रेस्तरां, मिठाई की दुकानों और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े छोटे कारोबार भी इससे प्रभावित होते हैं।
इसलिए सरकार को कार्टेल, कृत्रिम कमी और जमाखोरी के खिलाफ एक साथ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी को रोका जा सके।