9 अगस्त तक समझौता लागू नहीं हुआ तो उत्पादन और डिस्पैच ठप
मुख्य बिंदु:
- स्थानीय रोजगार को लेकर सारंडा में आंदोलन की चेतावनी
- 10 अगस्त से रांजाबुरु खदान बंद करने का ऐलान
- 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार लागू करने की मांग दोहराई
चाईबासा – सारंडा के रांजाबुरु लौह अयस्क क्षेत्र में स्थानीय रोजगार की मांग को लेकर ग्रामीणों, मुंडा-मानकी और सारंडा विकास समिति ने 10 अगस्त से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों ने सेल गुवा प्रबंधन और ठेका कंपनी पर समझौता नहीं मानने का आरोप लगाया।
उन्होंने 9 अगस्त तक कार्रवाई की समय-सीमा तय की है।
इसके बाद खदान का उत्पादन पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी गई।
वहीं, लौह अयस्क डिस्पैच और ट्रांसपोर्टिंग भी रोकने की घोषणा की गई।
गंगदा पंचायत के मुखिया राजू शांडिल ने आंदोलन की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों का धैर्य अब समाप्त हो चुका है।
उन्होंने पूर्व समझौते के पालन की मांग दोहराई।
इसके अलावा स्थानीय जमीन और संसाधनों पर अधिकार की बात कही।
उन्होंने बाहरी लोगों के वर्चस्व का विरोध किया।
ग्रामीणों के अनुसार त्रिपक्षीय वार्ता पहले हो चुकी थी।
बैठक में मंत्री दीपक बिरुवा भी शामिल थे।
वहीं, जिला प्रशासन और सेल प्रबंधन भी मौजूद थे।
बैठक में 18 प्रभावित गांवों के युवाओं को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी थी।
इसके अलावा 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार पर भी सहमति बनी थी।
रैक लोडिंग और ट्रांसपोर्टिंग में भागीदारी तय हुई थी।
प्रदूषण नियंत्रण और कारो नदी की सुरक्षा पर भी सहमति बनी थी।
हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने ठेका कंपनी मां सरला पर भी आरोप लगाए।
ग्रामीणों ने बाहरी लोगों की नियुक्ति का विरोध किया।
उन्होंने स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग दोहराई।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि ग्रामीणों ने आंदोलन को अधिकारों की लड़ाई बताया।
उन्होंने प्रशासन और सेल प्रबंधन से समाधान निकालने की अपील की।
ग्रामीणों ने कहा कि 9 अगस्त तक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन शुरू होगा।
