दिल का दौरा, बेहोशी, लकवा, दुर्घटना, सांस लेने में दिक्कत जैसी 12 परिस्थितियों को शामिल किया गया आपताकालीन चिकित्सा के दायरें में
चक्रधरपुर : रेलवे बोर्ड ने रेलवे कर्मचारियों, पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में बड़ा संशोधन किया है। नए आदेश के तहत अब आपात स्थिति में रेलवे कर्मचारी और पेंशनभोगी नजदीकी निजी या सरकारी अस्पताल में इलाज करा सकेंगे। इलाज पर होने वाला खर्च रेलवे द्वारा नियमों के अनुसार प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) के रूप में दिया जाएगा।
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेश में 12 प्रकार की गंभीर चिकित्सीय परिस्थितियों को आपातकालीन श्रेणी में शामिल किया गया है। इनमें हार्ट अटैक (तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम), अचानक बेहोशी, शरीर के किसी अंग में लकवा या कमजोरी, सांस लेने में गंभीर परेशानी, दुर्घटना या गंभीर चोट, अचानक असहनीय दर्द, प्रसव या गर्भावस्था संबंधी आपात स्थिति, किसी भी प्रकार का रक्तस्राव, पेट दर्द, उल्टी-दस्त के साथ डिहाइड्रेशन, सांप या जहरीले कीड़े के काटने की स्थिति, विषाक्तता, जलना या बिजली का झटका लगना शामिल हैं।
इसके अलावा चिकित्सक द्वारा प्रमाणित किसी भी अन्य जानलेवा स्थिति को भी आपातकालीन चिकित्सा के दायरे में रखा गया है। ऐसे मामलों में रेलवे कर्मचारी, पेंशनर और पारिवारिक पेंशनर निकटतम गैर-रेलवे सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज कराकर चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति पाने के पात्र होंगे।
रेलवे बोर्ड के इस फैसले से रेलवे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में खुशी की लहर है। कर्मचारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से आपातकालीन स्थिति में समय पर इलाज मिल सकेगा और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्राप्त होगी।
