July 25, 2026
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झारखंड

झारखंड: गिरिडीह में खटिया बनी एंबुलेंस, प्रसव पीड़ा से तड़पती गर्भवती को 4 किलोमीटर पैदल ले गए ग्रामीण

झारखंड: गिरिडीह में खटिया बनी एंबुलेंस, प्रसव पीड़ा से तड़पती गर्भवती को 4 किलोमीटर पैदल ले गए ग्रामीण

गिरिडीह (झारखंड) : जिले के पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत मधुबन थाना क्षेत्र के दालुवाडीह गांव से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है।

आजादी के 75 साल बाद भी ग्रामीण सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे हैं।

हालात इतने खराब हैं कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को “खटिया एंबुलेंस” का सहारा लेना पड़ा।

यह मामला उस विधानसभा क्षेत्र का है, जहां से राज्य के नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू प्रतिनिधित्व करते हैं।

जानकारी के अनुसार दालुवाडीह निवासी गर्भवती महिला सुनीता सोरेन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने का हवाला देकर एंबुलेंस पहुंचने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों और परिजनों ने मजबूरी में महिला को खाट पर लिटाया और उबड़-खाबड़ रास्तों से करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर पिपराडीह मुख्य सड़क तक पहुंचाया।

वहां से किसी तरह वाहन की व्यवस्था कर उन्हें अस्पताल भेजा गया।

यह घटना सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई को उजागर करती है।

एक ओर सरकार विकास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर गांवों में सड़क नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को खाट पर ढोना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि पिपराडीह तक सड़क बनी हुई है, लेकिन उसके आगे आज तक सड़क निर्माण नहीं कराया गया।

इसका खामियाजा कुरुवारांड, दालुवाडीह, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा समेत कई गांवों के लोग वर्षों से भुगत रहे हैं।

बारिश के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है, जब बीमार और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता है।

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। बुधन सोरेन, सुशील मुर्मू, सानो मरांडी, गोपाल मुर्मू, सोमरा मुर्मू, पतिराम मरांडी और बाबूलाल हांसदा समेत कई ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया।

ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेता गांव में बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद गांव की सुध लेने तक नहीं आते।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं कराया गया तो आने वाले चुनाव में वे वोट का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों ने दो टूक कहा — “रोड नहीं तो वोट नहीं।”

ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई मरीजों को खाट पर लादकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नींद अब तक नहीं टूटी। अब सुनीता सोरेन को खटिया के सहारे अस्पताल पहुंचाने की तस्वीर पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

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