August 5, 2026
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ताजमहल में भजन-कीर्तन की अनुमति किसने दी? वायरल वीडियो पर भड़के मौलाना रजवी

ताजमहल में भजन-कीर्तन की अनुमति किसने दी? वायरल वीडियो पर भड़के मौलाना रजवी

बरेली, 27 मई (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने ताजमहल में कथित भजन-कीर्तन के वायरल वीडियो पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर ताजमहल परिसर में भजन-कीर्तन हुआ है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसकी अनुमति किसने दी?

उनका कहना है कि ताजमहल जैसे ऐतिहासिक और संरक्षित स्मारक में इस तरह की गतिविधियों की इजाजत नहीं होती, फिर भी अगर ऐसा हुआ तो यह प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

मौलाना रजवी ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और ताजमहल प्रबंधन की जिम्मेदारी बनती है कि वहां नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पहले से ही कई गतिविधियों पर रोक है, तो फिर इस तरह का आयोजन कैसे हो गया। उन्होंने इसे एक ‘शरारती हरकत’ बताते हुए कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक या विवादित गतिविधि ऐतिहासिक स्थलों पर न कर सके।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर आज भजन-कीर्तन हुआ है तो कल कोई और गतिविधि हो सकती है, जिससे देश का माहौल खराब करने की कोशिश की जा सकती है। उनके अनुसार सांप्रदायिक सोच रखने वाले कुछ लोग जानबूझकर ऐसे कदम उठाते हैं ताकि समाज में तनाव पैदा हो। इसलिए ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। मौलाना ने यह भी कहा कि ताजमहल की सुरक्षा और प्रबंधन में तैनात अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि उनकी जिम्मेदारी थी कि नियमों का उल्लंघन न हो।

सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों को लेकर भी मौलाना रजवी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आजकल इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भड़काने और समाज में भ्रम फैलाने की कोशिशें लगातार हो रही हैं। खास तौर पर मुस्लिम युवाओं को उकसाने के लिए कई तरह के वीडियो और पोस्ट वायरल किए जाते हैं।

उन्होंने पाकिस्तान से जुड़े कुछ सोशल मीडिया चैनलों और विदेशों में बैठे लोगों का भी जिक्र किया, जो भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान देते हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे चैनलों और लोगों पर सख्त निगरानी रखी जाए और जरूरत पड़े तो उन पर प्रतिबंध लगाया जाए। देश की एकता और शांति के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए और नफरत फैलाने वाली ताकतों पर शुरुआत में ही रोक लगाना जरूरी है।

–आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम

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