July 25, 2026
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अभिलिप्सा पांडा के भजन ‘हर हर शंभू’ ने 7.43 करोड़ व्यू का आंकड़ा पार किया, हिंदू पोस्ट ने उजागर किया सेक्यूलर मीडिया का ‘फ़रमानी नाज़’ गेम

अभिलिप्सा पांडा के भजन ‘हर हर शंभू’ ने 7.43 करोड़ व्यू का आंकड़ा पार किया, हिंदू पोस्ट ने उजागर किया सेक्यूलर मीडिया का ‘फ़रमानी नाज़’ गेम
abhilipsa panda video har har shambhu

डेस्क: ओडिशा की गायिका अभिलिप्सा पांडा का भजन ‘हर हर शंभू’ सफलता के नये कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है। यूट्यूब पर अब तक इसे 7.43 करोड़ लोग देख चुके हैं और इसे 22 लाख से भी ज्यादा लोगों ने लाइक भी किया है। यह केवल मौलिक वीडियो का आंकड़ा है, जिसे सह गायक जीतू शर्मा ने अपलोड किया है। इसके वीडियो दूसरे लोगों द्वारा भी अपलोड किये गये हैं और उन्हें भी लाखों लोग लगातार देख और पसंद कर रहे हैं।

अभिलिप्सा पांडा 4 साल की आयु से ही संगीत सीख रही हैं और उन्होंने 2015 में एक संस्थान से भारतीय शास्त्रीय संगीत सीखा है। ओडिसी क्लासिकल संगीत भी उन्होंने सीखा है और उनका पूरा परिवार ही कला क्षेत्र में सक्रिय रहा है। उनके दादाजी भी ओडिशा के प्रसिद्ध कथाकार रह चुके हैं।

हर हर शंभू का मौलिक गाना जीतू शर्मा एवं अभिलिप्सा ने ही गाया था।

लेकिन हाल के दिनों में सेक्यूलर मीडिया द्वारा इस भजन को गाने का श्रेय बड़ी ही चतुराई से एक अन्य गायिका फ़रमानी नाज़ को देने की कोशिश की जा रही है।

जानबूझकर अनावश्यक विवाद के जरिए फ़रमानी नाज़ को एक सेक्यूलर चेहरे के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास बड़े ही सुनियोजित तरीके से वामपंथी अंदाज में आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसा प्रस्तुत किया जा रहा है मानों फ़रमानी नाज़ बड़ा खतरा मोल लेकर हिंदू धर्म के प्रति सहिष्णुता दिखा रही हैं और सेक्यूलरिज्म की कोई बहुत बड़ी आइकन हैं, जबकि तथ्य बिल्कुल भिन्न हैं।

उन्होंने स्वयं कहा है कि उन्होंने इस भजन को बस किसी भी अन्य गाने जैसा ही गाया है।

Hindu post screenshot
हिंदू पोस्ट के आलेख का स्क्रीनशॉट

वाराणसी से प्रकाशित एक प्रमुख डिजिटल पोर्टल हिंदू पोस्ट ने सेक्यूलर मीडिया की इस कोशिश का भंडाफोड़ करते हुए सारे तथ्य विस्तार से सामने रखे हैं और यह बताया है कि फ़रमानी के भाई ने स्वयं ही कहा है कि उन्हें कोई धमकी नहीं मिली है और न ही कोई फतवा जारी हुआ है।

हिंदू पोस्ट ने बताया कि जब ‘हर हर शंभू’ भजन काफी लोकप्रिय होने लगा तो कुछ लोगों ने धुन चोरी के नाम पर वीडियो स्ट्राइक कर उस वीडियो को यूट्यूब से ही रिमूव करवा दिया और यह आरोप लगाया कि इसकी धुन अच्युता गोपी जी से चुराई गयी है। हिंदू पोस्ट ने एक वीडियो का लिंक भी दिया और यह दिखाया कि स्वयं जीतू शर्मा जी ने यह कहा है कि कृष्ण भक्त अच्युता गोपी जी ने स्वयं ही अपनी धुन का उपयोग करने की अनुमति दी थी। इसके बाद यूट्यूब पर वह भजन वापस आया।

भजन की धुन के उपयोग से संबंधित जीतू शर्मा का स्पष्टीकरण।

इससे स्पष्ट होता है कि एक भजन की लोकप्रियता सेक्यूलर-वामपंथी ब्रिगेड को कितना परेशान कर सकती है और वे उसे हिंदू जनमानस से दूर करने के लिए क्या-क्या हथकंडे अपनाते हैं।

फ़रमानी नाज़ ने भी इस भजन को गाया है और उनके वीडियो को भी काफी लोगों ने देखा और पसंद किया है। सच तो यह है कि सावन में तो बेल के पत्ते की तस्वीर को भी लाखों लाइक मिल जाएँगे। शिव भक्ति के भजन की तो बात ही अलग है।

वैसे, अभिलिप्सा पांडा के गायन, उच्चारण, भाव और कलात्मकता में जो भक्ति-भाव दिखता है, वह उनके भजन में बिल्कुल नदारद है और यह किसी भी सामान्य हिंदू श्रोता को पहले ही कुछ सेकंड में स्पष्ट रूप से दिख जाता है। संस्कृत शब्दों के उच्चारण में अंतर जन्मजात संस्कृति और अध्ययन के कारण संभव है और स्वाभाविक है।

पर एक भजन को माध्यम बनाकर सेक्यूलर गेम खेलने का सेक्यूलर प्रयास सचमुच अचंभित करनेवाला है। जनसाधारण ऐसे गेम के बारे में ज्यादा गहराई से जानने का प्रयास नहीं करता और अक्सर सेक्यूलर मीडिया और वामपंथी प्रयास सफल हो जाते हैं।

इस प्रयास की पूरी कहानी की परतें विस्तार से खोली हैं हिंदू पोस्ट ने अपने इस आलेख में। 

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