रांची : झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए बड़ा दावा किया है। उन्होंने आशंका जताई कि केंद्र की भाजपा नीत सरकार इसी साल परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। बंधु तिर्की ने कहा कि यदि परिसीमन 2007-08 की रिपोर्ट के आधार पर किया गया, तो झारखंड के आदिवासी समुदाय इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
उन्होंने कहा कि परिसीमन में राज्य की आदिवासी आबादी के अनुपात के अनुसार अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

आदिवासी महाजुटाव रैली की तैयारियों की समीक्षा
रांची में प्रस्तावित आदिवासी महाजुटाव रैली की तैयारियों को लेकर आयोजित कार्यक्रम में बंधु तिर्की ने कहा कि रैली के माध्यम से झारखंड के आदिवासी समुदाय को केंद्र सरकार की नीतियों और उनके संभावित प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अगर 2007-08 में तैयार परिसीमन रिपोर्ट के आधार पर नई व्यवस्था लागू करती है, तो इसे झारखंड के आदिवासी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। उनके मुताबिक, परिसीमन में आदिवासी प्रतिनिधित्व को कमजोर करने के बजाय उनकी आबादी के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए।
झारखंड में एसटी के लिए 28 विधानसभा और पांच लोकसभा सीटें
झारखंड में विधानसभा की मौजूदा 81 सीटों में से 28 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। वहीं, राज्य की 14 लोकसभा सीटों में पांच सीटें एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। बंधु तिर्की ने कहा कि परिसीमन की नई व्यवस्था में आदिवासी प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए।
गौरतलब है कि देश में परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर पहले भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है। वर्ष 2008 में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई थी, जबकि झारखंड समेत कुछ राज्यों में परिसीमन की प्रक्रिया को वर्ष 2026 तक टाल दिया गया था।
एमएमडीआर संशोधन कानून के खिलाफ भी अभियान
बंधु तिर्की ने कहा कि प्रस्तावित आदिवासी महाजुटाव रैली में संसद से पारित खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक यानी एमएमडीआर संशोधन कानून के संभावित प्रभावों के बारे में भी लोगों को जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार झारखंड से खनिज संसाधनों का दोहन बढ़ाना चाहती है और खनिज अधिकारों तथा खनिज संपदा वाली जमीन पर कर लगाने के राज्य के अधिकार को सीमित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी।
कांग्रेस नेता के अनुसार, झारखंड की झामुमो-कांग्रेस गठबंधन सरकार संशोधित खनन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। जरूरत पड़ने पर राज्य में आर्थिक नाकेबंदी जैसे कदम उठाने की बात भी उन्होंने कही।
2026 के मॉडल से एसटी सीटें बढ़ने का दावा

वहीं, परिसीमन के प्रस्तावित मॉडल का समर्थन करने वाले कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि वर्ष 2026 के मॉडल के आधार पर एसटी के लिए आरक्षित सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी निशा उरांव ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि 2008 के परिसीमन के आधार पर आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या 28 से घटकर 22 हो सकती है। इसके विपरीत, 2026 के प्रस्तावित 50 प्रतिशत सीट वृद्धि मॉडल के तहत एसटी आरक्षित सीटों की संख्या 28 से बढ़कर 42 तक पहुंचने का दावा किया गया है।
निशा उरांव के मुताबिक, 2026 परिसीमन मॉडल में सभी राज्यों में मौजूदा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव बताया गया है। उनका कहना है कि इस मॉडल को अपनाए जाने पर आदिवासी आबादी के अनुपात में बदलाव के बावजूद एसटी आरक्षित सीटों में भी वृद्धि हो सकती है।
हालांकि, परिसीमन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। झारखंड में इस मुद्दे ने आदिवासी प्रतिनिधित्व, राजनीतिक सीटों के पुनर्गठन और राज्य के खनिज अधिकारों को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।