मुख्य बिंदु:
- जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रदर्शनी शुरू हुई
- सर दोराबजी ने 1920 ओलंपिक में भारत की मदद की
- प्रदर्शनी 29 अगस्त तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी
जमशेदपुर – टाटा स्टील ने सर दोराबजी टाटा की जयंती मनाई। कंपनी ने गुरुवार को विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
इसका शीर्षक ‘Celebration of Sports’ रखा गया है। प्रदर्शनी सर दोराबजी की खेल विरासत पर केंद्रित है। इसमें उनके खेल संबंधी योगदान को प्रमुखता दी गई है।
इस आयोजन से पहले प्रदर्शनी कोलकाता में लगाई गई। इसके बाद इसे जमशेदपुर लाया गया।

प्रदर्शनी में दुर्लभ ऐतिहासिक तस्वीरें प्रदर्शित हैं। पुराना पत्राचार और खेल स्मृतिचिह्न भी शामिल हैं। साथ ही, विभिन्न घटनाओं की जानकारी प्रस्तुत की गई है।
इनसे सर दोराबजी की खेल संबंधी सोच सामने आती है। वे खेलों को चरित्र निर्माण का माध्यम मानते थे। उनके लिए खेल राष्ट्रीय गौरव से भी जुड़े थे।
दूसरी ओर, वे खेलों को सामाजिक प्रगति से जोड़ते थे। उनकी सोच ने भारत की खेल यात्रा प्रभावित की। जमशेदपुर में कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पांजलि से हुई।

यह श्रद्धांजलि सर दोराबजी टाटा पार्क में दी गई। इसके बाद जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उद्घाटन हुआ। डी.बी. सुंदर रामम ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
वे टाटा स्टील में कॉरपोरेट सर्विसेज के उपाध्यक्ष हैं। कार्यक्रम में संजीव कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। चौधरी टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष हैं।
डॉ. टी. मुखर्जी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। टाटा स्टील के वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी भी पहुंचे। कई विशिष्ट अतिथियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
सर दोराबजी संगठित खेलों के बड़े समर्थक थे। उन्होंने भारत के ओलंपिक अभियान में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने 1920 एंटवर्प ओलंपिक के लिए सहयोग दिया। उस समय भारत का पहला ओलंपिक दल पहुंचा था।
इसके अलावा, उन्होंने भारतीय ओलंपिक संघ बनाने में योगदान दिया। वे 1927 में संगठन के पहले अध्यक्ष बने। इससे भारत के ओलंपिक आंदोलन को संस्थागत आधार मिला।
2027 में आईओए अपनी शताब्दी वर्षगांठ मनाएगा। इसी पृष्ठभूमि में प्रदर्शनी का महत्व बढ़ जाता है। आयोजन में इन ऐतिहासिक योगदानों को विशेष स्थान मिला।
कार्यक्रम में ‘A Celebration of Sports’ परिचर्चा भी हुई। इस चर्चा में तीन प्रमुख खेल हस्तियां शामिल हुईं। खेल इतिहासकार और लेखक बोरिया मजूमदार ने हिस्सा लिया।
ओलंपियन डोला बनर्जी भी चर्चा में शामिल रहीं। डोला बनर्जी अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित तीरंदाज हैं। पूर्णिमा महतो भी पैनल का हिस्सा रहीं।
पूर्णिमा महतो पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार प्राप्त तीरंदाज हैं। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना चुकी हैं। पैनल ने भारत की खेल यात्रा पर चर्चा की।
सर दोराबजी के योगदान का महत्व भी समझाया गया। चर्चा में संस्थागत सहयोग की जरूरत पर जोर रहा।
खेल प्रतिभाओं के विकास पर भी विचार हुआ। टाटा स्टील की खेल प्रतिबद्धता भी प्रदर्शनी में दिखी।
कंपनी दशकों से खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देती रही है। इसमें जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज शामिल है।
उच्चस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाओं पर भी निवेश हुआ है। एथलीट सहायता कार्यक्रम भी कंपनी की पहल हैं। इन प्रयासों से कई राष्ट्रीय चैंपियन उभरे हैं।
कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता पाई। प्रदर्शनी इतिहास और वर्तमान उपलब्धियों को जोड़ती है।
इससे सर दोराबजी की सोच की प्रासंगिकता सामने आती है। उनका दृष्टिकोण आज भी खेल विकास को प्रेरित करता है।
खेलों के अलावा उनका योगदान व्यापक था।

औद्योगिक विकास में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। वे परोपकार और संस्थान निर्माण से भी जुड़े थे।
टाटा स्टील के अध्यक्ष रहते उन्होंने कठिन दौर संभाले। उन्होंने कंपनी और कर्मचारियों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई।
उनके नेतृत्व मूल्य आज भी प्रेरणा देते हैं। इन मूल्यों से कई संस्थान आगे बढ़े हैं।
इनमें शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र भी शामिल हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान में भी इनका प्रभाव दिखता है।
सामुदायिक विकास और खेल भी इससे जुड़े हैं। वैसे, प्रदर्शनी 29 अगस्त तक जारी रहेगी।
इसे जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में देखा जा सकता है। आम लोगों के लिए प्रवेश का अवसर उपलब्ध है।
प्रदर्शनी सर दोराबजी की विरासत को करीब से दिखाती है। उनका विश्वास मानव क्षमता को लेकर स्पष्ट था। इसी सोच ने भारतीय खेलों की नींव मजबूत की।
आज भी उनकी विरासत खिलाड़ियों को प्रेरित करती है। संस्थागत स्तर पर भी इसका प्रभाव कायम है।