जमशेदपुर : सावन के तीसरे सोमवार को कोल्हान के शिवालयों में उमड़ेगा आस्था का सैलाब। ब्रह्ममुहूर्त से ही भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिरों के बाहर लंबी कतारें लगेंगी। दूर जाने वाले भोले शंकर के भक्त रविवार रात को ही रवाना हो गए। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक सावन के सोमवार को करने से भगवान शिव की विशेष कृपा रहती है।
श्रद्धालु हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष के साथ गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प और फल अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का पूजन-अर्चन करेंगे। वैसे तो प्रत्येक सोमवार को मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ रही है लेकिन तीसरी सोमवारी को मंदिरों में ज्यादा भीड़ उमड़ने की संभावना है। उधर देवघर व बासुकीनाथ में रिकार्ड भीड़ उमड़ेगी।
कोल्हान के इन मंदिरों में उमड़ेगी भारी भीड़
सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल स्थित प्राचीन कालीन जयदा शिव मंदिर, एनएच-33 (रांची-जमशेदपुर मार्ग) किनारे स्थित दलमा पहाड़ हाथियों के लिए संरक्षित है. यहां पहाड़ पर 3000 फीट ऊंचाई पर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। इसके अलावा पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर-पोड़ाहाट अनुमंडल के गोइलकेरा प्रखंड से तीन किलोमीटर दूर महादेव साल धाम, सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत खरसावां प्रखंड मुख्यालय से तीन किमी दूर रामगढ़ गांव के शिव मंदिर,पूर्वी सिंहभूम जिले के गालूडीह थाना क्षेत्र की झाटीझरना पंचायत में पहाड़ों के बीच काशीडांगा प्राचीन शिव मंदिर,पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला राजस्टेट राजबाड़ी के निकट प्राचीन शिव मंदिर,पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी में इली नदी के तट पर स्थित हाकुइयम शिव मंदिर,सरायकेला-खरसावां जिले के कुदरसाई स्थित बुद्धेश्वर महादेव शिव मंदिर ,पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड में चित्रेश्वर शिव मंदिर, पूर्वी सिंहभूम जिले के गालूडीह स्थित बंगाली पाड़ा में बूढ़ा बाबा प्राचीन शिव मंदिर,मुर्गा महादेव मंदिर कोल्हान के तीनों जिले व ओडिशा के कई जिलों के लोगों की आस्था का केंद्र है. जिसका वास्तविक नाम बाबा मृगेश्वर महादेव मंदिर है।पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा की पाथरी पंचायत स्थित मोहुलडांगरी स्थित कामेश्वर शिव मंदिर,पूर्वी सिंहभूम जिले के धालभूमगढ़ प्रखंड स्थित कोकपाड़ा स्थित प्राचीन व ऐतिहासिक कपिलेश्वर जीउ शिव मंदिर एवं पूर्वी सिंहभूम जिले में सुवर्णरेखा और शंख नदी के संगम स्थल देवली में देवलेशवर मंदिर।
