August 28, 2026
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चंडीगढ़ जीएमसीएच में एससी एमबीबीएस काउंसलिंग पर कोर्ट की रोक, बोनाफाइड सर्टिफिकेट विवाद पर उठे सवाल

चंडीगढ़ जीएमसीएच में एससी एमबीबीएस काउंसलिंग पर कोर्ट की रोक, बोनाफाइड सर्टिफिकेट विवाद पर उठे सवाल

चंडीगढ़, 25 अगस्त (आईएएनएस)। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के जीएमसीएच में एससी कैटेगरी के तहत एमबीबीएस एडमिशन काउंसलिंग पर रोक लगा दी है। मामला बोनाफाइड और माइग्रेंट सर्टिफिकेट को लेकर है। वकील प्रदीप शर्मा ने आरोप लगाया कि जीएमसीएच ने पहले जारी नोटिफिकेशन के आधार पर एससी उम्मीदवारों से आवेदन और शुल्क जमा कराए, लेकिन बाद में उनके सर्टिफिकेट को बोनाफाइड के बजाय माइग्रेंट बताकर जनरल कैटेगरी में रखने की बात कही।

शर्मा के मुताबिक, एक बार एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके नियमों को बीच में नहीं बदला जा सकता। हाईकोर्ट ने एससी काउंसलिंग पर रोक लगाई है, जबकि ओबीसी से जुड़ा मामला अभी लंबित है और जनरल कैटेगरी की काउंसलिंग की अनुमति दी गई है।

वकील प्रदीप शर्मा ने आईएएनएस से कहा, “भारत सरकार की तरफ से नीट यूजी 2026 के काउंसलिंग की लिस्ट जारी की गई। अलग-अलग राज्यों के बच्चों ने परीक्षा दी और अब उन्हें उनका रैंक मिल गया। ऑल इंडिया रैंक आने के बाद उन बच्चों को मेडिकल संस्थानों के अंदर अप्लाई करना होता है। चंडीगढ़ का मामला हाईकोर्ट में लाया गया है।”

वकील ने कहा कि 8 अगस्त 2026 को इन्होंने नोटिफिकेशन जारी किया कि आप इस तारीख तक अप्लाई कीजिए और दस्तावेज अपलोड कीजिए। इससे पहले कट-ऑफ लिस्ट आई, जिसमें जनरल कैटेगरी, ओबीसी, एससी और एनआरआई की लिस्ट जारी कर दी गई। उस लिस्ट में जो एससी उम्मीदवारों के नाम के आगे ये लिखा गया कि आपका सर्टिफिकेट माइग्रेंट है, बोनाफाइड नहीं है। इसलिए आपको जनरल कैटेगरी में समझा जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि जनरल कैटेगरी का स्कोर ऊपर जाता है। एससी और ओबीसी का स्कोर नीचे जाता है। जो ओबीसी और एससी उम्मीदवार हैं, उन्होंने अपनी कैटेगरी के अंदर अप्लाई किया था। ओबीसी और एससी में ही उन्होंने अपना टेस्ट भी पास किया था। वहां पर भी ऐसी कोई कंडीशन अप्लाई नहीं की गई है। वहां सीधा लिखा है कि आप एससी उम्मीदवार हैं। भारत सरकार की तरफ से अगस्त 2025 में नोटिफिकेशन जारी की गई, उसमें जातियों के नाम के साथ लिखा था कि ये जातियां एससी और ये ओबीसी के अंदर आएंगी।

प्रदीप शर्मा ने कहा, “उसके बाद उन्होंने अपना सर्टिफिकेट संबंधित प्राधिकरण से बनवाया। अप्लाई करने और शुल्क देने के बाद अब जीएमसीएच ये कहता है कि आप माइग्रेंट हैं, आप दूसरे केंद्र शासित प्रदेश से हैं, आप झारखंड से, बिहार, उत्तर प्रदेश से संबंधित हैं, आप चंडीगढ़ के निवासी नहीं हैं। आपको माइग्रेंट माना जाएगा और आपको यूटी पुल के अंदर नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का नियम यही कहता है कि एक बार अगर प्रक्रिया शुरू हो गई, तो नियम बीच में नहीं बदले जा सकते हैं।”

–आईएएनएस

केके/एबीएम

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