August 22, 2026
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‘वंदे मातरम’ का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा हिंदुस्तान : पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे

‘वंदे मातरम’ का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा हिंदुस्तान : पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे

भागलपुर, 21 अगस्त (आईएएनएस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कांग्रेस द्वारा ‘वंदे मातरम’ को लेकर लिए गए फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत ‘वंदे मातरम’ का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा। कांग्रेस पर अपनी राजनीतिक स्थिति लगातार कमजोर करने का आरोप लगाते हुए चौबे ने कहा कि अगर कांग्रेस को राष्ट्रभक्ति और देशभक्ति से परेशानी है तो उसे ‘वंदे मातरम’ की दो पंक्तियां भी गाने की जरूरत नहीं है।

अश्विनी चौबे ने कहा कि कांग्रेस को ‘वंदे मातरम’ गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है। लेकिन, जिस तरह से गीत के गायन को बीच में रोकने और केवल दो छंद गाने की बात कही जा रही है, उससे कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति आने वाले समय में और कमजोर होगी। कांग्रेस को अगर राष्ट्रभक्ति और देशभक्ति से चिढ़ है, तो दो लाइन क्यों गाना है? वह भी नहीं गाएं, कौन मना किया है?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति आगे और खराब हो सकती है। कांग्रेस खुद ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रही है, जिससे उसका राजनीतिक आधार कमजोर होता जा रहा है। पार्टी के लोगों ने पहले भी ऐसा किया और कुर्सी को लेकर चर्चाएं हुईं। चौबे ने सवाल उठाया कि अगर कुर्सी पर बैठाने के लिए राजनीतिक गतिविधियां हो सकती हैं तो फिर ‘वंदे मातरम’ के गायन को बीच में रोकने की जरूरत क्यों पड़ी?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जो गाना है, वह गाए और अगर देश का भला करना है तो वह भी करे, उसे कोई रोक नहीं रहा है। लेकिन, राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति को लेकर जिम्मेदारी सभी की है। राष्ट्रभक्ति केवल किसी एक व्यक्ति या किसी एक सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। आने वाली पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाना और देश को आगे बढ़ाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भीतर राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने का माध्यम है। नई पीढ़ी को देश के प्रति जिम्मेदारी और राष्ट्रप्रेम की भावना से जोड़ना जरूरी है, ताकि भारत को आगे बढ़ाया जा सके।

चौबे ने वर्ष 2047 का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने के समय मौजूदा पीढ़ी शायद वहां मौजूद न हो, लेकिन देश रहेगा और आज की युवा और नई पीढ़ी उस समय भारत के भविष्य को आगे बढ़ा रही होगी। आज जन्म लेने वाली पीढ़ी वर्ष 2047 में करीब 20 वर्ष की उम्र की होगी। ऐसे युवाओं में राष्ट्रप्रेम और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि देश सनातन संस्कृति के अपमान को भी स्वीकार नहीं करेगा। भारत की संस्कृति ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के जरिए पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश दिया है। ‘वंदे मातरम’ को लेकर संसद में एक्ट पास किया गया है। सरकार और सभी सांसदों ने मिलकर इसे पारित किया है। यदि कांग्रेस को इसे नहीं गाना है या इस संबंध में कोई अलग निर्णय लेना है तो यह उसकी अपनी इच्छा है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने उन सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें ‘वंदे मातरम’ को किसी एक समुदाय से जोड़कर देखने की बात होती है। उन्होंने कहा कि इस गीत को किसी एक समुदाय के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए। चौबे ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, कविवर रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद का जिक्र करते हुए कहा कि इन लोगों ने भारत को आगे बढ़ाने और देश की पहचान को मजबूत करने में योगदान दिया। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के सफर में देश की नई पीढ़ी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऐसे में युवाओं को देश के इतिहास, बलिदान और राष्ट्रप्रेम की भावना से जोड़ना जरूरी है।

–आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

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