September 11, 2026
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जमशेदपुर बालीगुमा सुखना बस्ती से सरायकेला स्थानांतरित हुआ मेघा डेयरी संयंत्र

जमशेदपुर बालीगुमा सुखना बस्ती से सरायकेला स्थानांतरित हुआ मेघा डेयरी संयंत्र

ठगे और छले गए ग्रामीणों के पक्ष में सांसद और विधायक आगे आकर रोकें स्थानांतरण : विकास सिंह

जमशेदपुर : झारखंड सरकार की मेघा दूध डेयरी का मानगो के बालीगुमा सुखना बस्ती में लगने वाला 50 टीएलपीडी का प्लांट अब मानगो के बालीगुमा सुखना बस्ती में नहीं बनेगा, उस प्रोसेसिंग प्लांट को सरायकेला खरसावां जिले के तितिरबिला ग्राम में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस स्थानांतरण के निर्णय पर अंतिम झारखंड सरकार की कैबिनेट की बैठक में मुहर लग गई।

प्लांट के स्थानांतरण होने पर एक दशक से अधिक समय से मानगो बालीगुमा सुखना बस्ती के ग्रामीणों ने अपने क्षेत्र के संपूर्ण विकास और बेरोजगारी दूर होने का जो सपना सजा कर रखा था वह टूट गया । आक्रोशित और मायूस लोगों की पहल में विकास सिंह सुखना बस्ती में प्रस्तावित प्लांट के स्थल पर पहुंचकर लोगों की भावनाओं से अवगत हुए ।

मौके में पहुंचे विकास सिंह ने बताया की पूरे मानगो के लिए स्थानांतरण बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है। एक तो पहले से ही मानगों में कोई रोजी रोजगार के साधन नहीं थे। जो उम्मीद लोगों में जगी थी वह भी अब टूट गई ।

कहा कि लगभग दस वर्ष पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ओर पुनः 7 मार्च 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने सुखना बस्ती मानगो में मेघा डायरी संयंत्र का भूमि पूजन किया था । दो बार मुख्यमंत्री के द्वारा भूमि पूजन होने पर स्थानीय सुखना बस्ती ग्रामीणों में न केवल रोजगार की बल्कि संपूर्ण विकास की आस जगी थी ।

स्थानीय लोगों को पूरा भरोसा था की प्लांट का निर्माण होने पर लोगों को रोजगार मिलेगा तथा क्षेत्र का विकास होगा लेकिन स्थानीय विधायक और सांसद की अनदेखी और क्षेत्र में रोजगार सृजन करने की मंशा नहीं रहने के कारण लोगों का सपना टूट गया । विकास सिंह ने कहा कि जब दोबारा जनवरी 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भूमि पूजन किया था उसी समय उन्होंने इस सुंदर अवसर को सरायकेला अपने विधानसभा क्षेत्र में ले जाने की बात ठानी होगी जिसे तरह-तरह के नियम कानून का आईना दिखलाकर प्लांट को सरायकेला खरसावां के तितिरबिला ग्राम में शिफ्ट कर दिया गया है।

स्थानीय लोगों का आक्रोश इस बात पर भी है कि जहां प्लांट लगने वाला था वह खुला मैदान था। जहां लोग खेलकूद के आयोजन के साथ-साथ व्यायाम और सांस्कृतिक कार्यक्रम किया करते थे। उस स्थान पर प्लांट लगाने का झूठा सपना दिखलाकर घेराबंदी कर लिया गया ।

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